– थाना सिरगिट्टी के नयापारा में पति-पत्नी ने की आत्महत्या।
– सुबह माता-पिता को फंदे पर लटका देख चीख पड़े बच्चे।
बिलासपुर!
थाना सिरगिट्टी क्षेत्र के नयापारा में मंगलवार सुबह सामने आए एक हृदयविदारक घटनाक्रम ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। यहां पति-पत्नी ने एक ही साड़ी को फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि जिस कमरे में दोनों ने यह कदम उठाया, उसी कमरे में उनके दो मासूम बच्चे भी मौजूद थे। सुबह जब बच्चों की नींद खुली तो उन्होंने अपने माता-पिता को फंदे पर लटका देखा और चीख पड़े। बच्चों की चीख सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। मृतक के भाई भी वहां पहुंचे, लेकिन कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था बच्चों ने किसी तरह दरवाजा खोला। जहाँ रमेश सिंह बंजारा (36) और उनकी पत्नी माया बंजारा (31) फांसी पर लटके हुए थे दोनों मूल रूप से जामकछार,अनूपपुर (मध्यप्रदेश) के निवासी थे और वर्तमान में सिरगिट्टी के नयापारा में किराए के मकान में रह रहे थे।
सामने का मंजर देखकर 10 वर्षीय बेटी अंकु पूरी तरह सहम गई, जबकि 7 वर्षीय आयुष भी डर के मारे कांपता रहा। कुछ ही देर पहले तक जिन बच्चों के सिर पर माता-पिता का साया था, सुबह होते-होते वे दोनों इस दुनिया से जा चुके थे।

(देर रात उठाया आत्मघाती कदम)
प्रारंभिक तौर पर अंदेशा लगाया जा रहा है कि देर रात बच्चों के सो जाने के बाद पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ होगा जिसके कारण दोनों ने यह आत्मघाती कदम उठाया। घटना की सूचना मिलते ही सिरगिट्टी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को फंदे से नीचे उतारा। पुलिस ने मर्ग कायम कर पंचनामा कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिए हैं वही आत्महत्या के कारणों का फिलहाल स्पष्ट पता नहीं चल सका है पुलिस जांच मे जुटी है।

(एक ही मकान में रहते थे दो सगे भाई)
मृतक के बड़े भाई चंद्रपाल सिंह बंजारा ने बताया कि वें ओमकार सिंह बंजारा और मृतक रमेश तीनों भाई है और बिलासपुर में किराए के मकान में रहते थे। जिस मकान के ऊपर के कमरे में रमेश और माया ने आत्महत्या की, उसी मकान के नीचे मृतक का भाई ओमकार अपने परिवार के साथ रहता था। रमेश सिरगिट्टी स्थित एमएम फीस कंपनी में कार्यरत था सुबह बच्चों की चीख सुनकर परिवार और आसपास के लोगों को घटना की जानकारी हुई।
(पीछे रह गए दो मासूम बच्चे)
मृतक दंम्पति के दो बच्चे है दोनों बच्चों से एक ही पल में उनका पूरा सहारा छीन लिया। अंकु और आयुष के लिए यह सुबह उनके जीवन की सबसे भयावह सुबह बन गई। जिस उम्र में बच्चों को मां की ममता और पिता का सहारा चाहिए, उस उम्र में दोनों ने अपनी आंखों के सामने माता-पिता को खो दिया। घटना ने सिर्फ दो जिंदगियां खत्म नहीं कीं, बल्कि दो मासूम बच्चों के सिर से एक ही पल में माता-पिता का साया भी छीन लिया।

