दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे नवजात को मिली नई जिंदगी, एक माह की जंग के बाद स्वस्थ होकर घर लौटा मासूम
बिलासपुर।
जन्म लेते ही सांसों के लिए संघर्ष कर रहे एक नवजात की जिंदगी बचाकर श्री शिशु भवन हॉस्पिटल, बिलासपुर की विशेषज्ञ टीम ने चिकित्सा क्षेत्र में उम्मीद की नई मिसाल पेश की है। दोनों नासिका मार्ग जन्म से बंद होने के कारण गंभीर स्थिति में पहुंचे नवजात का Bilateral Choanal Atresia का सफल उपचार किया गया।
लोरमी के डोंगरी पारा निवासी गौसिया परवीन के नवजात का जन्म 3 जुलाई 2026 को हुआ था। जन्म के तत्काल बाद ही उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। स्थिति बिगड़ने पर परिजन उसी दिन उसे श्री शिशु भवन हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। डॉ. श्रीकांत गिरी के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया और बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए करीब एक सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट दिया।

👉जटिल सर्जरी ने खोली सांसों की राह
बच्चे की स्थिति स्थिर होने के बाद विशेषज्ञों ने बंद नासिका मार्ग को खोलने के लिए आवश्यक जटिल सर्जिकल उपचार किया। इसके बाद भी करीब 30 दिनों तक लगातार चिकित्सकीय निगरानी और विशेष नर्सिंग केयर जारी रही। आखिरकार नवजात ने उपचार का सफलतापूर्वक जवाब दिया और 8 अगस्त को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी लेकर माता-पिता की गोद में घर लौटा।

👉क्या है Bilateral Choanal Atresia?
यह नवजात शिशुओं में होने वाली एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी है, जिसमें नाक के दोनों पिछले वायुमार्ग जन्म से ही बंद रहते हैं। इससे बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी और ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। ऐसे मामलों में तत्काल श्वसन को स्थिर करना और विशेषज्ञ सर्जिकल उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है।
👉पूरी टीम ने मिलकर बचाई नन्ही जिंदगी
इस चुनौतीपूर्ण उपचार में डॉ. श्रीकांत गिरी, डॉ. रवि द्विवेदी, डॉ. अंकित ठकराल, डॉ. प्रणव अंधारे, डॉ. विशाल मांझी और डॉ. मोनिका जायसवाल सहित पूरी चिकित्सकीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अस्पताल प्रबंधक नवल वर्मा के मार्गदर्शन में नर्सिंग एवं सपोर्ट स्टाफ ने भी पूरी संवेदनशीलता से नवजात की देखभाल की।

👉मासूम को गोद में लेकर छलक पड़े खुशी के आंसू
करीब एक महीने बाद जब स्वस्थ बच्चे को माता-पिता की गोद में सौंपा गया तो परिवार की आंखों में खुशी के आंसू थे। परिजनों ने चिकित्सकों और पूरी टीम के प्रति आभार जताया।
सांसों की जंग जीतकर घर लौटा यह मासूम इस बात की प्रेरणादायक मिसाल है कि समय पर इलाज, विशेषज्ञ चिकित्सा और टीमवर्क मिलकर जिंदगी को मौत के मुहाने से वापस ला सकते हैं।

एक नन्ही जिंदगी को मिला नया जीवन, एक परिवार की उम्मीद हुई साकार।

