बिलासपुर। बिलासपुर-कोरबा नेशनल हाईवे पर मंगलवार देर रात एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला। कोनी थाना क्षेत्र अंतर्गत गतौरी के पास तेज रफ्तार ट्रेलर ने सड़क पर मौजूद मवेशियों के झुंड को रौंद दिया। दर्दनाक हादसे में 9 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक नंदी गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस, गौसेवक और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। घायल नंदी का रेस्क्यू कर उसे छतौना स्थित गौरी गोपाल गौसेवा धाम भेजा गया, जहां उसका उपचार जारी है। वहीं मृत 9 मवेशियों का गौसेवकों ने अंतिम संस्कार किया।

यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले एक वर्ष में मवेशियों के कुचले जाने की यह चौथी बड़ी घटना है। इससे पहले जुलाई 2025 में मस्तूरी-रायपुर हाईवे पर 18 गायों, बिलासपुर-रायपुर हाईवे पर 15 गायों तथा रतनपुर रोड पर एक गर्भवती गाय समेत 8 गायों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। लगातार हो रहे हादसों ने हाईवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
👉हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी नहीं बदले हालात
सड़कों पर आवारा मवेशियों की समस्या को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर लगातार सुनवाई जारी है। अदालत कई बार राज्य सरकार और एनएचएआई को फटकार लगा चुकी है तथा मुख्य सचिव सहित संबंधित अधिकारियों से जवाब भी तलब कर चुकी है। कोर्ट ने मवेशियों को हाईवे पर आने से रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था, गौधामों के बेहतर संचालन और नियमित निगरानी के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं।
👉गौसेवकों ने उठाई ठोस व्यवस्था की मांग
लगातार हो रहे हादसों के बाद गौसेवकों और सामाजिक संगठनों ने नेशनल व स्टेट हाईवे पर गौ सुरक्षा फेंसिंग, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में गति सीमा तय करने, प्रत्येक जिले में गौ एम्बुलेंस की व्यवस्था तथा आवारा मवेशियों के लिए पर्याप्त शेड और चारे की स्थायी व्यवस्था की मांग की है।
✍️बड़ा सवाल… आखिर जिम्मेदार कौन?
हाईकोर्ट के सख्त निर्देश, सरकारी दावों और करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद यदि हाईवे पर बेजुबान जानवर लगातार मौत का शिकार हो रहे हैं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जिम्मेदार कौन है? यदि समय रहते ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे आगे भी दोहराए जाते रहेंगे।

