रायपुर..! राजधानी के नकटी गांव में सोमवार को प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में 20 से 25 जेसीबी मशीनों की मदद से 80 से अधिक मकानों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया। कई लोग अपने घर बचाने के लिए जेसीबी के सामने खड़े हो गए, जिससे कुछ देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग भी किया।
सुबह से ही नकटी गांव पुलिस छावनी में तब्दील नजर आया। करीब एक हजार पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर मौजूद रही। जैसे ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई, ग्रामीणों ने “घर मत तोड़ो” और “वापस जाओ” जैसे नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। विरोध के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी और देखते ही देखते कई मकान मलबे में तब्दील हो गए।
उजड़ते आशियानों के बीच छलका दर्द
कार्रवाई के दौरान कई परिवारों की आंखों में अपने आशियाने उजड़ने का दर्द साफ दिखाई दिया। महिलाएं बच्चों को सीने से लगाकर रोती रहीं, बुजुर्ग बेबस नजर आए, जबकि मासूम बच्चे मलबे के ढेर के बीच अपने घरों को तलाशते दिखे। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से बनाया गया उनका आशियाना कुछ ही घंटों में ढहा दिया गया।
👉सांसद के आश्वासन के बाद कार्रवाई से बढ़ा आक्रोश
ग्रामीणों का आरोप है कि दो दिन पहले सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बारिश के मौसम में मकान नहीं तोड़े जाने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद सोमवार सुबह प्रशासन की कार्रवाई शुरू होने से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीण इसे विश्वास टूटने की घटना बता रहे हैं।
👉कांग्रेस ने सरकार को घेरा
कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा कि सरकार अपराध रोकने में असफल है, लेकिन गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने में तत्पर है। उनका कहना है कि विधायक कॉलोनी के लिए नया रायपुर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, ऐसे में बसी-बसाई बस्ती को उजाड़ने की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने सांसद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
✍️मंत्री केदार कश्यप बोले— किसी के साथ अन्याय नहीं होगा
प्रदेश के मंत्री केदार कश्यप ने मामले में कहा कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी परिवार के साथ अन्याय नहीं होने देगी और सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
👉विकास बनाम विस्थापन का सवाल
नकटी गांव की कार्रवाई ने विकास और विस्थापन को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। सरकार इसे सार्वजनिक परियोजना के लिए आवश्यक कदम बता रही है, वहीं प्रभावित परिवार सवाल उठा रहे हैं कि क्या विकास की कीमत हमेशा गरीबों को ही चुकानी पड़ेगी। अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर टिकी हैं।

