बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में सोमवार को न्यायमूर्ति श्रीमती रजनी दुबे के सेवानिवृत्ति अवसर पर गरिमामय विदाई समारोह आयोजित किया गया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के न्यायालय कक्ष में आयोजित समारोह में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी एवं न्यायालय परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने न्यायमूर्ति रजनी दुबे के विधिक ज्ञान, निष्पक्षता, प्रशासनिक दक्षता एवं न्यायिक सेवा में उनके उल्लेखनीय योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पूरे कार्यकाल में धैर्य, संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ न्याय किया तथा बार और बेंच के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति दुबे का शांत स्वभाव, संतुलित दृष्टिकोण और विनम्रता न्यायपालिका की गरिमा को निरंतर बढ़ाते रहे।
अपने कार्यकाल में न्यायमूर्ति रजनी दुबे ने एकल पीठ में 537 तथा खंडपीठ में 151 प्रकाशित निर्णय दिए। वहीं 18,775 से अधिक मामलों का निराकरण कर न्यायिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निर्णय संवैधानिक मूल्यों और विधि के शासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
विदाई संबोधन में न्यायमूर्ति रजनी दुबे ने मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीशगण, न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, सहयोगियों एवं न्यायालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने न्यायिक जीवन के अनुभव साझा किए।
30 जून 1964 को जबलपुर में जन्मी न्यायमूर्ति रजनी दुबे ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1987 में अधिवक्ता के रूप में विधिक जीवन की शुरुआत करने के बाद 1990 में सिविल जज बनीं। उन्होंने मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में विभिन्न महत्वपूर्ण न्यायिक पदों पर सेवाएं दीं। 18 जून 2018 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की न्यायाधीश नियुक्त हुईं तथा 11 मई 2020 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। समारोह में न्यायपालिका, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, न्यायिक अकादमी, प्रशासन, पुलिस विभाग एवं उच्च न्यायालय के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

