– 2022 से 2025 तक सर्वश्रेष्ठ महिला गायिका आवार्ड से हुई सम्मानित।
🗞️🗞️कन्हैया कौशिक – संडे स्पेशल 🗞️🗞️
सफलता और असफलता जीवन के दो पहलू है, इस दौरान बड़ा मुकाम पाने के लिए जरूरी है इंसान के पास हुनर और कुछ करने का जुनून हो। बिलासपुर की प्रसिद्ध महिला सिंगर अनुपमा मिश्रा की कहानी इस वाक्य को चरितार्थ करती है। जो एक नहीं अनेको छत्तीसगढ़ी गाने गाकर अपने मधुर स्वर का जादू चला रही हैं जिनकों सूरों की अच्छी समझ है साथ ही युवा पीढ़ी भी उनके गाने के कायल है। छत्तीसगढ़ में लगने वाले हर एक फ़िल्म मे इनके गाने लोगो को अपनी ओर आकर्षित करती है आज वे जिस मुकाम पर है उन्होंने अपनी मेहतन और लगन के सहारे पाया है। इनके द्वारा गाए गाने सिर्फ छत्तीसगढ़ मे ही नहीं अन्य राज्यों मे भी सुनाई देता है जिन्हे 2022 से 2025 मे स्मार्ट सिनेमा सर्वश्रेष्ठ प्ले बैक महिला गायिका आवार्ड से नवाजा गया है।

अनुपमा मिश्रा बिलासपुर की बेटी के साथ ही बहु भी है जिन्हे छत्तीसगढ़ की स्वर कोकिला के नाम से जाना जाता है इनके द्वारा गाए हर लोकगीत ,जसगीत के गाने आज लोगो के जुबान पर है बड़े बुजुर्ग तो क्या युवा पीढ़ी इनके स्वर के दीवाने है। बचपन मे ही इन्हे गाना गाने का सौक था जो बचपन मे अपने मोहल्ले की मंदिर मे कीर्तन भजन करती थी आज बड़े पर्दे पर इनका गाना लोगो को खूब लुभा रहा है। अब तक इन्होने हजारों गाने गाए परन्तु सतरंगी रे एल्बम से इन्हे एक नया अयाम मिला। रतनपुर के एक छोटे से स्टूडियो मे लाइव रिकार्डिंग पर अपनी प्रस्तुति दे कर आज छत्तीसगढ़ के साथ ही कई बड़े शहरों व राज्यों मे लोग इन्हे सुनना पसंद कर रहें है जो छत्तीसगढ़ के साथ ही बिलासपुर के लिए बड़े ही गौरव की बात है। अनुपमा मिश्रा उन लोगो के लिए भी एक मिशाल है जो संगीत के क्षेत्रों मे अपनी पहचान बनाना चाहते है। अनुपमा का कहना है की कोई भी किरदार छोटा बड़ा नहीं होता अगर अपने सपनो को सकार करना है तो बस दृढ निश्चय व अपने काबिलियत पर भरोसा रखें। उन्होंने बताया की एक मंदिर से आज बड़े बड़े स्टूडियो तक के सफर मे कई कठिनाइयो का सामना करना पडा कभी कभी हमारे द्वारा दी गई प्रस्तुति एक पल मे नकार दिया जाता है जो हमारे लिए उससे बेहतर करने की सिख होती है मुझे गर्व है मै छत्तीसगढ़ महतारी की बेटी हु।
(परिवार से मिल रहा पुरा सहयोग)
छत्तीसगढ़ बिलासपुर की सुप्रसिद्ध गायिका अनुपमा मिश्रा ने बताया की बचपन से गाने का सौक था इनके परिवार मे संगीत विद्या मे कोई नहीं है। बावजूद इन्हे बचपन से ही इस क्षेत्र मे जाने की चाह रही उनका कहना है की इसके लिए न तो कभी मेरे मायके मे न ही ससुराल मे कोई रोक टोक किया गया पुरे परिवार का सहयोग मुझे हमेशा मिलता आ रहा है। जॉब के बावजूद मै अपनी छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बरकरार रखने से कभी पीछे नहीं हटूंगी।
(पहले लाइव रिकार्डिंग के दौरान चुनौती का सामना)
अनुपमा मिश्रा ने बताया की पहले सभी कलाकार एक साथ होने के बाद ही लाइव रिकार्डिंग होता था जो बहुत कठिन था अब कई तकनीक से पहले की अपेक्षा कम मेहनत लग रही है। परन्तु आज भी वही दौर है अगर आवाज अच्छी रही तो मशीन से निकलने वाले म्यूजिक काम कर जाता है परन्तु आवाज ही अच्छी नहीं तो मशीन का तालमेल नहीं बैठ पाता जो कभी कभी बड़ी चुनौती होता है।

