कन्हैया कौशिक -{बिलासपुर}
बिलासपुर – 3 दिसंबर को किसकी कुंडली चमकेगी और किसकी कुंडली पलटेगी, अपने ही दिए मतों के फैसले के इंतजार में है जनता।

बिल्हा विधानसभा चुनाव में दो दिग्गज राजनीतिज्ञों के बीच का महासंग्राम नि:संदेह रूप से बहुत ही कड़े मुकाबले के दौर पर आकर थमा है और जनता द्वारा दिया गया जनादेश ईवीएम में लॉक हो गया है। मतदाताओं के ज्ञान विवेक पर अगर पूरा भरोसा किया जाए तो उन्होंने अपने हक में जिस नेतृत्व को चुना होगा इसका फैसला 3 दिसंबर को घोषित हो जाएगा। अब जो बात सुनने को मिल रही है वो यह कि धरम लाल कौशिक एवं सियाराम कौशिक के बीच के सीधे कांटेदार मुकाबले के इस चुनाव से जुड़े हर छोटे बड़े चुनावी कलाकारों के साथ-साथ उन लोगों की धड़कनें भी बढ़ी हुई है जिन्होंने चुनावी चूल्हे में पकने के लिए चढ़े सियासती व्यंजन की महक को सूंघा है..
{चुनावी मठाधीशों ने खोल दिए हैं अपने पोथी पुरान}
3 दिसंबर की तारीख जो कि महज 11
दिन दूर है पर उसके इंतजार का एक-
एक पल काटे नहीं कट रहा है. ऐसे में
कई चुनावी मठाधीशों ने स्वयंभू ज्योतिष
ज्ञान के अपने चक्षुओं को खोलकर दावे
प्रतिदावों की ऐसी पोथी पुरान खोल कर
रखे हैं, मानो उन्होंने ईवीएम मशीन के
अंदर से घुसकर ही मतदान के आंकड़े
और प्रतिशत को निकाल कर बिल्हा
विधानसभा की धरा में चौसर की बाजी
पर शकुनि के पांसे की तरह बिखेर दिया
है. कई चुनावी जजंतरम ममंत्रम
बैगाओ की माने तो उन्होंने तो जैसे
ईवीएम से पहले ही क्षेत्र के मतदाताओं
को गिन कर बैठ गए हैं.. फिलहाल तो
ऐसे लोगों की भी अभी कोई कमी नहीं
थोड़ा बहुत तो कोई दावा ही नहीं कर रहा है..अभी यह स्थिति हो गई है कि एक
गली से निकले तो कांग्रेस 10000 से
जीत रही है. दूसरी गली ठीक से पहुंचे
नहीं कि भाजपा 10000 से जीत जाती
है नगर में ही जिन्होंने बड़े-बड़े दावे
करके सियासी योद्धाओं के तिजोरियों से
पोटलिया लेकर निकले हैं उनकी तो
सबसे ज्यादा धुकुर पुकुर हो रही है कहीं
पोटलियों का असर ईवीएम से बाहर नहीं निकला तब तो फिर जो कनबुच्ची
लगेगी उसकी तो कई लोगों ने
रिहर्सल आरंभ कर दी है वही कुछ
अपना दोष को दूसरे की मुड़ी में थोपने
के लिए कारण और चेहरा तैयार कर
लिया है…
{मतदान केंद्र में नहीं हुआ मतदान सीधा असर ग्राम चहेते नेता को }
बिल्हा विधानसभा के ग्राम दडहा में इस वर्ष चुनाव सम्पन्न तो हुआ परन्तु एक भी मत नहीं डला जबकी यहा मतो की संख्या 960 है यहा चुनाव बहिस्कार किया गया है जिसका सीधा असर ग्राम पार्टी प्रेमी को दिखाई देगा अगर वे मात्र गिनती के मतो से पराजित होते है तो शिवाय खुद को कौशने के कोई भी कारण नजर नहीं आएगा।
{चर्चोए आम}
बिल्हा विधानसभा क्षेत्र में यह माना जाता है कि जिस पक्ष का विधायक बनता है प्रदेश में उसकी सत्ता नहीं रहती और जिसकी सत्ता रहती है उसका विधायक नहीं रहता यह क्रम पिछले कुछ चुनाओं से निरंतर बना हुआ है। एसे में कही न कही पार्टी के दोनों ही दलों को यह चिंता भी सता रही है इनके गले से निवाला भी निचे नहीं निकल रही है डर सता रही है की प्रदेश में सरकार उनकी हुई तो विधायक विपक्ष का होगा या विधायक पक्ष को आया तो सरकार विपक्ष की बन जाएगी देखना होगा आगे क्या होता है।



