कन्हैया कौशिक _{बिलासपुर}
राजधानी – विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और भाजपा ने एक-दूसरे से आगे बढ़कर जिस तरह से घोषणाओं की प्रतिस्पर्धा की है, उससे किसान और महिलाएं उत्साहित हैं। स्थिति यह बन गई है कि सरकार किसी की भी बने, इन्हें अच्छा खासा लाभ मिलना तय है। दरअसल, कांग्रेस ने प्रति एकड़ 20 क्विंटल धान खरीदने की घोषणा की है तो भाजपा ने 21 क्विंटल प्रति एकड़ का दांव खेला है। भाजपा ने 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान करने का वादा किया है तो कांग्रेस ने 3,200 रुपये की दर तय की है। भाजपा ने महिलाओं को सालाना 12 हजार रुपये देने की घोषणा की है तो कांग्रेस ने 15 हजार रुपये सालाना देने का वादा कर दिया है। अन्य घोषणाओं में भी उन्नीस-बीस का ही अंतर है। अब बात भरोसे पर आ टिकी है। जिस पार्टी की घोषणाओं पर मतदाता भरोसा करेंगे, जीत का सेहरा उसके ही सिर बंधेगा।
विधानसभा चुनाव अब निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। दूसरे चरण में शेष 70 सीटों के लिए 17 नवंबर यानी कल मतदान होना है। बुधवार शाम पांच बजे से चुनाव प्रचार भी थम गया। यानी मतदाता अब दोनों ही राजनीतिक दलों द्वारा की गई घोषणाओं को तौलकर किसी निर्णय पर पहुंचना चाहेगा। चूंकि इनकी घोषणाओं में ज्यादा अंतर नहीं है,इसलिए प्रत्याशी का व्यक्तिगत प्रभाव भी काफी मायने रखेगा।
{ए रहें कांग्रेस की घोषणाएं}
– 20 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी और किसानों का कर्ज माफ।
– 3,200 रुपये प्रति क्विंटल धान की कीमत।
– सभी वर्ग की महिलाओं को गैस सिलिंडर में 500 रुपये की सब्सिडी।
– भूमिहीनों को 10,000 रुपये प्रतिवर्ष।
– 17.50 लाख गरीबों को आवास।
-युवाओं को उद्योग व्यवसाय ऋण में 50 प्रतिशत सब्सिडी।
– तेंदूपत्ते का प्रति बोरा 6,000 रुपये, 4,000 रुपये सालाना बोनस।
– 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज।
– हर महिला को 15 हजार रुपये सालाना।
– महिला स्व सहायता समूहों का कर्ज माफ।
– केजी से पीजी तक मुफ्त में शिक्षा।
{वही भाजपा की घोषणाएं}
– 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी और दो साल का बकाया बोनस।
– 3,100 रुपये प्रति क्विंटल धान की कीमत और एकमुश्त भुगतान।
– गरीब परिवारों की महिलाओं को 500 रुपये में गैस सिलिंडर।
– भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को 10 हजार रुपये सालाना।
– 18 लाख आवास, हर घर में पीने का शुद्ध पानी।
– युवाओं को 50 प्रतिशत सब्सिडी के साथ ब्याज मुक्त ऋण।
– तेंदूपत्ता का 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा, 4,500 रुपये बोनस, चरणपादुका।
– प्रति परिवार पांच लाख से 10 लाख तक स्वास्थ्य बीमा, 500 नए सस्ते जन औषधि केंद्र।
– प्रत्येक विवाहित महिला को सालाना 12,000 रुपये की वित्तीय सहायता।
– हर संभाग में एम्स की तर्ज पर सिम्स, आइआइटी की तर्ज पर सीआइटी, एक लाख भर्ती।
{सरकारी अस्पतालो में व्यवस्था दुरुस्त करने किसी ने नहीं की पहल}
आज राज्य सहित जिले में शासकीय अस्पतालो की हालात खराब है मरीज अपना उपचार कराने दर दर की ठोंकर खाते हुए अन्य राज्यों में उपचार करा रहें है एसे में साफ है की छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था पुरी तरह चरमरा चुकी है जबकी सरकार को इसी पर जोर देने की आवश्यकता है।मामूली से लेकर गंभीर बिमारी का उपचार अपने ही राज्य में हो सके इसके साथ ही सरकारी अस्पतालो में डॉक्टरो की मनमानी पर कड़ी कार्रवाई व 24 घंटे प्रशिक्षित डॉक्टर की ड्यूटी लगानी चाहिए साथ ही प्राइवेट हॉस्पिटल में मनमाने चार्ज को कम करने सहित स्वास्थ्य सेवा में लोगो को बेहतर लगे इसके लिए अन्य राज्यों के तरह स्वास्थ्य कानून व्यवस्था करने की जरुरत है।
{छुट के साथ शिक्षा बेहतर करने की जरूरत} राज्य में दोनों ही पार्टी के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ाई निशुल्क करने का घोषणा किया है.पर एसे घोषणा का क्या मतलब जिसमे बच्चो को उचित शिक्षा न मिल सके आज शिक्षा का स्तर गिरता ही जा रहा है सरकारी स्कूलों में पढ़ाई महज अब सोच से कोशो दूर निकलता जा रहा है। कही शिक्षको की कमी तो कही जानकार शिक्षको की कमी से राज्य के हर जिले का स्कूल पुरी तरह प्रभावित होगा रहा है बच्चे पड़े न पड़े आज आठवीं कक्षा चुटकी में पास होगा जा रहें है जिसका असर अब इनके पठन पाठन में दिखने लगा है। शिक्षक भी बच्चो को छोड़ मनोरंजन करने जुटे रहते है इन सभी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा कानून बनाने की आवश्यकता है।


