बिलासपुर -(कन्हैया कौशिक)
- विश्व पर्यावरण दिवस स्पेशल
बिलासपुर सिरगिट्टी फदहाखार स्थित वनभूमि पर मिनी जू,इको पार्क,नेचर पार्क,जैव विविधता पार्क सहित नगर वन विकसित करके स्मृति वाटिका व बिलासा ताल की तरह पर्यटक स्थल बनाने का दावा किया गया। फदहाखार आरक्षित वन क्षेत्र की जमीन पर कभी 400 एकड़ से ज्यादा घना प्लांटेशन और नर्सरी हुआ करती थी परन्तु अब यहां छायादार पेड़ो के लाले पड़े हुए हैं वही काटे दार पेड़ो से पुरा वन क्षेत्र पटा हुआ हैं। अतिक्रमण की वजह से यह बड़ा जंगल अब धीरे-धीरे गायब हो रहा हैं यहां कई योजनाए कागजो तक सिमित रह गई हैं। वर्ष 2020 में जहाँ वन्य प्राणी रखने सहित बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले ,फिसलपट्टी और गार्डन में फूलदार व शोभादार पौधों की हरियाली रखने की बात कही गई थी जमीनी स्तर पर बिल्कुल उलट हैं। यहां नगर वन फदहाखार के लिए मिनी जू के तर्ज पर गेट तो बना दिया गया हैं परन्तु यहां बने तालाब देखरेख के आभाव व पानी की उचित व्यवस्था नहीं होने से सूखने की कगार पर हैं लोहे के बाउंड्रीवाल अधूरा पड़ा हुआ हैं। पूर्व में लगाए गए पौधे नस्ट हो चुकी हैं बनाए गए गुड़वत्ताहिन पानी टंकी कई जगह से लिकेज हैं सडके कच्ची हैं,कुछ स्थान पर लगे चैका पत्थर उखड़ चुके हैं इतने बड़े वन क्षेत्र में महज एक ही बोर चालू हैं जिससे पौधे को पानी नहीं मिल पा रहा हैं पौधे सूखे पड़े हुए हैं। यहां मौषमी फ़ालतू पौधे का भरमार हैं यहां हरियाली कागजो के हवाले हैं सुसज्जित पर्यटक स्थल लोगो के लिए सपना बन चुका हैं।
(पूर्व सांसद और वर्तमान के उपमुख्यमंत्री अरुण साव थे मुख्य अतिथि)
2022 में भारत सरकार के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा हरियाली महोत्सव मनाते हुए पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में बड़ी पहल बताते हुए 50 हेक्टेयर क्षेत्र में बड़े पैमाने में फलदार और छायादार पौधों को लगाया गया था पौधारोपण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिलासपुर के पूर्व सांसद और वर्तमान उपमुख्यमंत्री अरुण साव थे जिनके साथ कई प्रशासनिक अधिकारियों ने पौधा रोपा। बड़े ही खुशनुमा महौल में साव जी ने पौधे में पानी भी डाले विभाग ने सरक्षण का भरोसा दिलाया लेकिन आज वहां वें पौधे नजर नहीं आ रहें हैं सिर्फ वहां अनगिनत इटो के घेरे नजर आ रही हैं विभाग उन पौधों को भी सुरक्षित नहीं रख सके।

(कई हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण हावी)
फदहाखार आरक्षित वन क्रमांक 1 में लगभग 25 से 30 हेक्टेयर भूमि में अतिक्रमण हो गया है न सिर्फ बड़े मकान बना चुके हैं। बल्कि इन्हे सरकारी योजना के तहत बिजली,पानी,शौचालय तक उपलब्ध करा दिया गया हैं। प्रशासनिक उदासीनता: केंद्र सरकार की अनुमति के बिना रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन पर निर्माण नहीं किया जा सकता, लेकिन वन विभाग की कथित उदासीनता और लापरवाही के चलते यह जमीन माफियाओं की भेंट चढ़ गई।
(नर्सरी में क्षेत्र की महिलाए करती थी पौधे की देखरेख) जानकारी के अनुसार आज से महज कुछ वर्ष पहले यह फदहाखार नर्सरी
के नाम से जाना जाता था जहाँ अनगिनत पौधे की देखरेख करने जॉब कार्ड बनाकर पौधो की देखरेख के लिए आसपास की महिलाओ युवतियों को रखा गया था। जिनके द्वारा पौधो की देखरेख के साथ ही नियमित समय में पानी व खाद्य देती थी जों पौधे कई इलाकों में भेजा जाता था परन्तु अब नर्सरी बंद कर दी गई हैं। इसे गार्डन बताया जा रहा हैं परन्तु यहां न तो पेड़ो की छाव हैं न ही लगाए गए पौधे सुरक्षित हैं।


