कन्हैया कौशिक -{बिलासपुर}

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जनमत की असल तस्वीर साफ़ होने की घड़ी आ गई बस एक रात बाकी है और सुबह का सूरज उगने के साथ शाम ढलते प्रदेश के मतदाता जनादेश के साक्षी बन जाएंगे इसके एक दिन पहले की रात 5 साल की 1825 रातों से अलग हैं। अगले पांच साल का भार उठाने से ज्यादा भारी यही रात है जब करवटें बदलते उम्मीदवारों के भविष्य की घड़ी सुबह होते ही अलार्म बजाना शुरू कर देगी। सूबे के राज में ‘कमल’ अपनी खुशबू बिखेरेगा या फिर ‘पंजा’ संभालेगा, रविवार की दोपहर की गुनगुनी धूप में रुझानों की चमक बता देगी पहले भी सरकार बनती रही, सत्ता छिनती रही। लेकिन इस बार चटपटी सियासत का तड़का चुनाव परिणामों के जरिए नई राजनीति का व्यंजन तैयार करने आमादा हैं। इशारा तीन दिन पहले के एग्जिट पोल के महापंडितों ने भी किया। उनकी भी अग्निपरीक्षा का दिन हैं कसौटी पर खरे न उतरने वाले भी पराजित प्रत्याशियों की तरह धकेल दिए जाएंगे। क्योकि पहली दफा एग्जिट पोल तक चुनाव करने पब्लिक को दिमाग लगाना पड़ा हैं।

