– कुष्ठ रोगी दर-दर भटकने को मजबूर संबंधितो से लगा रहा गुहार।
बिलासपुर- कई वर्षों से समाज घर परिवार से बेदखल कुष्ठ रोगियों पर अब तकनीकी व्यवस्था भी बड़ी बाधा बन गई है। हाथों से लचार व दृष्टि से बेबस अब सरकारी योजना से वंचित नजर आ रहें है जों अपनी पीड़ा लिए जिला कलेक्टर कार्यालय व खाद्य अधिकारी को आवेदन सौंपते हुए अपनी पीड़ा सुनाए। दरअसल बिलासपुर नयापारा व मरी माई मंदिर स्थित कुष्ठ रोगियों को केवाईसी संबंधित समस्या आन खड़ी हो गई है।

वर्तमान में सरकारी योजना के लिए केवाईसी अनिवार्य कर दिया गया है परन्तु यहां रहने वाले अधिकांश लोग कुष्ठ रोग से पीड़ित हैं जिसके कारण उनके हाथों की उंगलियां या तो क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं या पूरी तरह काम नहीं करतीं। इनकी आँखे या तो पुरी खुलती नही तो कइयों ने मोतियाबिंद की आपरेशन करा लिए है ऐसे में फिंगरप्रिंट व आँख आधारित ई-केवाईसी और सत्यापन उनके लिए एक बड़ी परेशानी बन चुकी है। इनके मध्य जीवन यापन करने सरकारी योजना द्वारा मिलने वाले चालव,निराश्रित पेंशन,महतारी वंदन की राशि प्राप्त करने में बड़ी दिक्क़तो का सामना करना पड़ रहा है। अब वें सभी प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनके लिए फिंगरप्रिंट के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था (जैसे आईरिस स्कैन, ओटीपी या मैनुअल सत्यापन) लागू की जाए, ताकि वे भी सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें।
(इनके मध्य आन खड़ी हुई सबसे बड़ी समस्या)
सरकार की कई योजनाएं – जैसे राशन वितरण,बैंकिंग सेवाएं,गैस कनेक्शन और पेंशन- अब बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) सत्यापन पर आधारित हैं। लेकिन जिनके हाथों में उंगलियां ही नहीं बचीं, वे मशीन पर अपनी पहचान कैसे दर्ज कराएं परिणाम स्वरूप इन्हे राशन नहीं मिल पा रहा,बैंक से पैसा निकालने में दिक्कत गैस और अन्य जरूरी सेवाएं ठप,पेंशन तक अटक रही है इन हालातों ने पहले से ही संघर्ष कर रहे इन लोगों की जिंदगी और कठिन बना दी है।
(कृष्णा बाई चौहान)
नयापारा चुचुहिया पारा कुष्ट आश्रम निवासी कृष्णा देवी ने बताया किहम लोग पहले ही बीमारी से जूझ रहे हैं अब सुविधाओं के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है। हाथ नहीं होने के कारण मशीन हमें पहचान नहीं पाती जिससे हम हर सुविधा से वंचित हो रहे हैं। हमें प्रशासन से उम्मीद है की हमें भी सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिले।
(कई वर्षो से वोट दे रहें है पर निराश्रित नहीं मिल रही धनवार)
यहां के रहा रहें धनवार सतनामी की माने तो वें यहां कई सालो से निवास कर रहें है जों कई वर्षो से न सिर्फ निगम बल्कि विधानसभा चुनाव में वोट ड़ालते है। परन्तु उन्हें निराश्रित नहीं मिलती जिसके लिए सभी से निवेदन कर चुके है परन्तु कोई उनका सुनंने वाला नही है।

