रायपुर। छत्तीसगढ़ में आरटीई के तहत संचालित प्रवेश प्रक्रिया को लेकर निजी स्कूलों और राज्य सरकार के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। कम प्रतिपूर्ति राशि और वर्षों से उसमें बढ़ोतरी न होने से नाराज़ निजी स्कूल प्रबंधन ने इस वर्ष RTE के तहत नए प्रवेश नहीं देने का बड़ा फैसला लिया है।

राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में इस निर्णय का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। जानकारी के अनुसार, राज्य के 6000 से अधिक निजी स्कूलों में RTE के तहत होने वाली प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के हजारों बच्चों की पढ़ाई पर संकट खड़ा हो गया है।
निजी स्कूल संचालकों का आरोप है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि कई वर्षों से नहीं बढ़ाई गई है, जबकि स्कूलों के संचालन का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि वास्तविक खर्च के मुकाबले बेहद कम है, जिससे स्कूलों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
स्कूल प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ सरकार हाई कोर्ट के निर्देशों का भी सही तरीके से पालन नहीं कर रही है। उनके अनुसार, न्यायालय द्वारा समय-समय पर दिए गए आदेशों के बावजूद प्रतिपूर्ति राशि में सुधार नहीं किया गया, जिससे उनकी समस्याएं और बढ़ गई हैं।
इसी के विरोध में निजी स्कूलों ने असहयोग आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक वे RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे।इस फैसले का सबसे बड़ा असर गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों पर पड़ने वाला है, जो RTE के तहत निजी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करते हैं। अभिभावकों में इस निर्णय को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि उनके बच्चों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।

