– सिलपहरी स्थितनचिकेता पावर एंड स्टिल व अग्रवाल इन्फ्रास्ट्रक्चर कर रही लोगों के जान के साथ खिलवाड़।
– पहले मौखिक अब लिखित आगे उग्र आंदोलन की चेतावनी।
बिलासपुर – औद्योगिक परिक्षेत्र सिलपहरी स्थित नचिकेता पावर एंड स्टिल व अग्रवाल इन्फ्रास्ट्रक्चर के चिमनीयों से
उगल रहा धुआं जहर बनकर लोगों की जिंदगी को तबाह कर रहा है। जिसके चलते कई गावों की स्थिति भयावह बनी हुई है
ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है इसकी शिकायत न केवल पर्यावरण प्रदूषण विभाग बल्कि जिला कलेक्टर से भी की गई। परन्तु किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई नही होता देख ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। सैकड़ो की संख्या मे ग्रामीण बुधवार को इन कारखानो के प्रबंधको के मनमानी के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कारखाना
प्रबंधक का घेराव कर दिए। जहाँ ग्रामीण प्रबंधक के आगे भाऊक और आँखों से आँशु पोछते हुए कहे हमें रोज रोज जहर परोसने से अच्छा है एक ही पल मे मार डालो। दरअसल कारखानो के चिमनीयों हाफरो से चौबीसो घंटे बेतरतिब निकलने वाले डस्ट से न केवल सिलपहरी के लोग बल्कि इससे जुड़े कई गांव के ग्रामीणों हलाकान है। इससे तो पर्यावरण प्रदूषण हो ही रहा है बडो के साथ ही बच्चों को सांस लेने आँखों मे जलन के साथ ही देखने मे दिक्कत का सामना करना पड रहा है। कारखाने से निकलने वाले कानफोड़ू आवाज के कारण लोगों सुनने मे परेशानी का सामना करना पड रहा है। ग्रामीणों ने प्रबंधक की लापरवाही का पुरजोर विरोध करते हुए अगले 15 दिनों का समय दिए है। इसके बाद भी अगर प्रबंधक अपनी मनमानी से बाज नही आया तो उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी गई है इस दौरान सिलपहरी सरपंच टीकाराम यादव के साथ भारी संख्या मे ग्रामीण सामिल रहें।
(ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़)
जानकारी के मुताबिक इन कारखानो के चिमनीयों हाफरो से निकलने वाले डस्ट से न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है इंसानों का जीवन खतरे में तो है। यहां रहने वाले पशु-पक्षी पेड़-पौधे किसानों के अनाज सब्जी तरकारी से लेकर तालाब भी असुरक्षित है डस्ट के चलते गर्भ में पलने वाले बच्चे भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। यहां घरो का रंगरोधन पुरी तरह खो चुकी है लोग
ग्रामीणों ने कहा की यहाँ स्थानीय लोगों को भगाया जाता है और राज्य से बाहरी लोगों को काम मे रखा जा रहा है।
(जनसुनवाई चिमनीयों से नही निकलेगी डस्ट,और यहां सांस लेना मुश्किल)
जनसुनवाई मे इन्ही कारखानो ने
अधिकारियो और ग्रामीणों के समक्ष चिमनियों व हांफरो से थोड़ा भी डस्ट नही निकलने का दावा किया था वर्तमान मे यहां सांस लेना मुश्किल हो गया है। कारखानों के प्रबंधक यहां सारी नियमों की धज्जियाँ उड़ाने मे कोई कसर नही छोड़ रहें है। यहां बाउंड्रीवाल से भी ऊंचा कोयले को डंप करवाया गया है। इनके द्वारा कन्वेयर बेल्ट,मशीनों को भी कवरिंग नही कराया गया है साथ ही कोयले के डस्ट को दबाने नियमित पानी का छिड़काव नही कराया जा रहा है। न ही कारखानों मे ईएसपी फिल्टर प्लांट लगाया गया है अगर लगा भी है तो उसे बाईपास कर पर्यावरण मे जहर परोसा जा रहा है।

