– देर रात तक आग बुझाने जुटी रही दर्जनों दमकल।
– आगजनी मे दो युवकों की हुई मौत सिरगिट्टी पुलिस जांच मे जुटी।
– मृतक का भाई आशीष बोला आग लगी तो भागा परन्तु मेरे भाई को निकलने का भी मौका नही मिला।
बिलासपुर/ औद्योगिक परिक्षेत्र सिरगिट्टी मे मंगलवार को हुई आगजनी की घटना मे एक मजदूर जिन्दा जल गया वही आग मे बुरी तरह झूलसा सेल्सकर्मी ने अस्पताल जाते समय दम तोड़ दिया। घटना
के बाद आक्रोषित परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर घटना स्थल पर घंटो डटे रहें। गहमा गहमी महौल के बाद कारखाना प्रबंधक पुलिस प्रशासन व परिवार के सहमति के बाद मृतक के अस को उठाया गया सिरगिट्टी पुलिस मामला दर्ज कर जांच मे जुटी हुई है। मंगलवार की दोपहर सिरगिट्टी सेक्टर डी स्थित मित्तल फर्नीचर कारखाने मे कई विस्फोट के बाद जबरजस्त आग लग है। इस भीषण आग मे फसे तिफरा निवासी मजदूर अभिजीत सूर्यवंशी (आयुष) पिता धनश्याम सूर्यवंशी उम्र 20 वर्ष जिन्दा जल गया जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई बुधवार की सुबह पुलिस को युवक का अश कारखाने के अंदर एक कोने मे पाया गया। वही इस घटना मे गंभीर रूप से आग की लपटो के साथ बाहर निकले सिरगिट्टी महिमा नगर निवासी रितेश शुक्ला पिता अशोक शुक्ला उम्र 23 वर्ष की मौत अस्पताल ले जाते समय रास्ते मे हो गया। इस घटना के बाद दोनों परिवार मे मातम पसर गया सिरगिट्टी पुलिस मामला दर्ज कर जांच मे जुटी हुई है वही पंचनामा कार्रवाई के बाद अस व युवक का शव परिजनों को सौप दिया।


(सात घंटे डटे रहें परिजन व नागरिक)
घटना के बाद बिल्हा कांग्रेस कमेटी ब्लाक अध्यक्ष लक्ष्मीनाथ साहू,पार्षद पुष्पेंद्र साहू की अगवाई मे परिजन व नागरिक मुआवजे की मांग किए। परन्तु प्रबंधक की ढुलमूल रवैए के चलते मामला आंदोलन का रूप ले लिया लगभग सात घंटे तक पीड़ितों को उचित न्याय व मुआवजे की मांग करते हुए कारखाने के खिलाफ जमकर नारा बाजी किए। शाम करीबन चार बजे मृतकों के परिजनों को 10-10 लांख रुपए का चैक साथ ही नगद 25-25 हजार दाह संस्कार के लिए दिया गया ।

(1 टेंकर,1 छोटा हाथी सहित 6 मोटरसाइकिल जल कर खाक)
कारखाने मे आग की लपटो मे न सिर्फ मृतक की नई बाईक सीजी 10 बीयू 5441 होंडा लियो जला। बल्कि वहा रखे अन्य कर्मियों के 6 मोटरसाइकिल के साथ केमिकल से भरे एक टेंकर व छोटा हाथी भी जल गया। जिसमे सिर्फ वाहन के ढांचे दिखाई दे रहा है कारखाने मे लगी आग बुधवार की सुबह भी धधक रहा था जिसे निगम के दमकल कर्मियों ने बुझाया।


(फर्नीचर की आड़ मे तारपीन का धंधा) घटना के बाद जब मौके का जायजा लिया गया तब कारखाना प्रबंधक द्वारा फर्नीचर कम यहां अति ज्वलनशील पदार्थ तारपीन का काफी मात्रा मे भंडारण किया गया था। सूत्रों की माने तो यहां फर्नीचर की आड़ मे तारपीन का गोरख धंधा जोरो से किया जाता है। यहां छोटे बोतल कार्टून मे भरे अनगिनत डिब्बे रहें साथ ही कई 50 लीटर के टिन व 30000 के दो बड़े टंकी भरा हुआ था सूत्रों की माने तो टेंकर तारपीन से भरा पड़ा था।
(प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया आप बीती)
जिस वक़्त यह आगजनी की घटना घटी उस दौरान वहा कुछ मजदूर और काम कर रहें थे जिन्होंने बताया की टेंकर मे तारपीन भरा था जिसे खाली किया जा रहा था। जल्दबाजी करते हुए पाईप के जरिए मोटर से खाली किया जा रहा था उसी दौरान मोटर से चिंगारी उठी और तारपीन तक जा पंहुचा जिसके बाद कारखाने के द्वार पर भीषण आग लगी। कुछ लोग तो अपनी जान बचा कर भाग गए परन्तु एक मजदूर बाहर नही निकल पाया और दुसरा आग की लपटो के साथ बाहर निकला।
(आखिर किसके शह पर यहां जारी है तारपीन का खेल) उक्त कारखाने के प्रबंधक द्वारा फर्नीचर गोदाम या फिर ज्वलनशील पदार्थ के भंडारण के नाम से उद्योग विभाग से जमीन ली गई है। परन्तु फर्नीचर के कार्य मे इतने मात्रा मे तारपीन रखना कई सवाल खडे कर रहें है। इसके साथ ही अगर प्रबंधक द्वारा ज्वलनशील पदार्थ के भंडारण के लिए जमीन ली गई है तो कारखाने परिसर मे सुरक्षा उपकरण की अनदेखी क्यों की गई थी यह जांच का विषय है।

