– गाँव मे सड़क की मांग आक्रोषित ग्रामीणों ने किया था चक्काजाम,चुनाव बहिस्कार।
– सिर्फ आश्वासन ही मिला मुलभुत सुविधा के लिए आज भी तरस रहें ग्रामीण।
– खेतों की तरह हल चलाकर सड़क पर ग्रामीणों ने रोपा धान।

बिलासपुर –
बिल्हा ब्लाक अंतर्गत आने वाले विधानसभा मस्तूरी के ढेका मानिकपुर-धुमा की सड़क की स्थिति बेहद दयनीय है हालात ए है की यहां के ग्रामीण जान हथेली मे रखकर इस कीचड भरी सड़क पर चलने मजबूर है। इस सड़क का उपयोग करने वाले ग्रामीणों ने सड़क की मांग को लेकर चक्काजाम किए चुनाव बहिस्कार किया बावजूद संबंधितो के कानो मे जु तक नहीं रेंगा लिहाजा अब ग्रामीण अपना आक्रोश दिखाते हुए उस कीचड भरी सड़क पर धान का रोपा लगा कर संबंधितो को गाँव के विकास की आईना दिखा रहे है। आजादी के बाद से बसे इस ग्राम की मुख्य सड़क आज भी उसी तरह मिट्टी व गिट्टी की है जिस तरह की सड़क से गुजारा कर एक पीढ़ी ने अपना जीवन यापन कर लिया ।

यहां 2004 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क बनाई गई थी जिसके बाद मरम्मत तो छोड़ सड़क और पेचिंग का कार्य भी नहीं कराया गया है जबकि इस सड़क से लोग ढेका से मानिकपुर तो धुमा से अन्य ग्राम की ओर आवागमन करते है। संबंधितो के अनदेखा किए जाने के कारण उक्त सड़क उखड़ कर पूरी तरह मिट्टी के धरसे मे परिवर्तित हो चुकी है जो बरसात के समय में कीचड़ से भर जा रही है। इस सड़क पर सूखे दिनों मे धूल तो वर्तमान मे कीचड से ग्रामीणों का चलना दुश्वार हो गया है जबकि लोग अभी पूरी बरसात इस दलदल भरी सड़क का दंश झेलेंगे इस सड़क से न केवल ग्रामीण आवागमन करते हैं बल्कि छोटे-छोटे बच्चे स्कूल तक जाते है। ग्रामीणों का कहना है की कोई भी अधिकारी सिर्फ एक दिन इस सड़क से चलकर दिखा दे जिसमे हमें अभी पूरा बरसात चलना है अब ग्रामीणों का सब्र का बाँध टूटता नजर आ रहा है जो विरोध स्वरूप सड़क पर ट्रैक्टर से मताई कर धान का रोपा लगा कर प्रदर्शन कर रहे है

(20 सालो मे सरकार बदले पर नहीं बदली गांव के सड़क की तश्वीर) ग्रामीणों ने बताया की न जाने क्यों हम ग्रामीणों की सड़क की समस्या को देखकर किसी भी अधिकारी का दिल क्यों नहीं पसीजता जबकि तीन से चार बार प्रदेश में सरकार बदल गई और कई कलेक्टर भी आकर चले गए परन्तु न जाने हमारे गांव को किसकी नजर लग गई है। इस सड़क से स्कूली बच्चे,बूढ़े हादसे का शिकार होते है देश मे सरकारें बदल गई परन्तु नही बदले हालात अधिकारी और नेता सभी मौन है और हम ग्रामीण सड़क का दंश झेलने मजबूर है।
(सड़क पर चक्कजाम चुनाव बहिस्कार के बाद भी किसी ने नहीं लिया सुध)
कई वर्षो के मांग आंदोलन चक्का जाम करने के बाद पीडब्ल्यूडी के द्वारा शहर से सिलपहरी पासीद मार्ग का निर्माण तो कराया जा रहा है परन्तु उससे जुड़े धुमा मानिकपुर गाँव की सड़क की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। विधानसभा चुनाव बहिस्कार के दौरान वहा भी लोगो को सिर्फ आश्वासन का झुनझुना थमा दिया गया। जहाँ बिलासपुर एसडीएम जिला पंचयात अधिकारी सहित पीडब्लूड़ी के द्वारा चुनाव के एक सप्ताह के भीतर कार्य प्रारम्भ करवाने का आश्वासन दिया गया जिसपर शाम पांच बजे के बाद ग्रामीणों ने मतदान डाले परन्तु आज तक कोई अधिकारी उस ग्राम के ओर रुख तक नहीं मोड़ रहें है।

