बिलासपुर – कतियापारा मोपका चौक में स्व. लल्लू हलवाई के वार्षिक श्राद्ध के दौरान आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान में रविवार को कथा आचार्य पं.देवेंद्र पाण्डेय ने तुलसी वर्षा,हवन,कपिला तर्पण, सहस्त्रधारा पूजा और विसर्जन कराया। इसके दौरान उन्होंने कहा कि जो कोई श्रीमद भागवत कथा का श्रवण करे, घर में गाय व तुलसी का महत्व समझे और घर में श्रीमद् भागवत ग्रंथ रखे, उसे दैविक, दैहिक और भौतिक ताप से मुक्ति मिल जाती है।कथावाचक ने कथाप्रंसग के दरमियान कहा कि हम मनुष्य बड़े ही भाग वाले होते हैं जो भगवान की भक्ति कर सकते हैं।

वेद पुराणों के अनुरूप चार लाख 84 हजार योनि के पश्चात ही मानव जीवन की प्राप्ति होती है। इसी मानव जीवन में प्रभु की भक्ति सर्वोपरी है जो भी मानव सधो ह्रदय से भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करता है भगवान श्रीकृष्ण स्वयं उस भक्त की सभी मनोकामना पूर्ण कर उनके दुख दूर कर लेते हैं। कथा प्रसंग में तुलसी वर्षा व श्रीमदभागवत महापुराण का पाठ कर भगवान का परलोकधाम गमन के बारे में वर्णन कर जनमानस को भक्ति गीत संगीत के साथ सराबोर किया

भागवत कथा के सारांश उपसंहार भगवान श्री कृष्ण की सोलह हजार एक सौ आठ रानियों व इनसे विवाह के पीछे के वास्तविक दर्शन, भगवान कृष्ण के द्वारका में राजपाठ, सुदामा से मित्रता, सुदामा की दरिद्रता के हरण प्रसंगों की कथा सुनाकर महोत्सव को विराम दिया गया। आचार्य पाण्डेय ने चार दिनों तक भागवत के विभिन्न प्रसंगों को संगीतमय प्रकृति से श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। मंदिर परिसर में श्री राधे-राधे की गूंज से वृंदावन धाम का अनुभव होता रहा। कथा का विश्राम बृज की होली, हवन-पूजन और तुलसी वर्षा के साथ भव्य रूप से किया गया।

कथा व्यास ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि नरकासुर ने कन्याओं को कैद कर रखा था भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया। इसके बाद कन्याओं को कैद से मुक्त कराया और सभी कन्याओं को पत्नी के रूप में स्वीकार किया। वहीं स्यमंतक मणि की कथा सुनाते हुए कहा कि श्रीकृष्ण पर एक बार मणि चोरी करने का आरोप लगा था, भगवान ने उस मणि को जामवंत से प्राप्त करके वापस राजा प्रसेन को दिया।

इसके बाद जामवती के साथ विवाह हो गया। शुकदेव जी ने परीक्षित को बताया कि भगवान की कथा को श्रद्धा और विश्वास के साथ इस प्रकार से सुनें तो चार व सात दिनों के अंदर श्रोता भगवान को स्वयं प्राप्त कर सकते हैं। तुलसी वर्षा के पश्चात श्रीमदभागवत महापुरान की महाआरती कर ब्राम्हण भोज के बाद प्रसाद वितरण किया गया।

