कन्हैया कौशिक-नव संवाद बिलासपुर
बिल्हा विधानसभा सीट छत्तीसगढ़ के बिलासपुर लोकसभा सीट का हिस्सा है यहा की जनता इतनी जागरूक है कि चुनाव जीतने वाली पार्टी के नेता को दोबारा मौका नहीं देती। जनता के मिजाज को देखा जाए तो हर बार चुने जाने वाले विधायकों को सिर्फ 5 वर्ष के लिए मौका दिया जा रहा है। बिल्हा विधानसभा सीट में वर्ष 1990 से अब तक हुए विधानसभा चुनावों में यहां की जनता ने हर बार पार्टी विशेष के प्रत्याशियों को दोबारा एमएले की ताज़ पर नहीं बैठाया है छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले मे भी यही प्रथा चली आ रही है बिल्हा क्षेत्र के परसदा मे दोनों ही पार्टियों के सक्रिय नेता का निवास स्थान भी है। जो एक ही समुदाय से बिलांग करते है बिते बीस वर्षो मे यहा एक ही समुदाय के नेता विधायक बने भाजपा ने एक बार फिर पूर्व मे जीते विधायक को अपना प्रबल दावेदार मानकर चुनावी मैदान मे उतार दिया है वही कांग्रेस की ओर से अब तक अपने प्रत्यासी का नाम उजागर नहीं किया गया है। बिल्हा विधानसभा ऐसी सीट है जो वर्ष 1993 के बाद कोई भी पार्टी रिपीट नहीं हुई है एसे मे कांग्रेस को भी क्षेत्र मे अपना अहम स्थान सहित मतदाताओ से आपसी संबंध को देखते हुए अपने ओर से प्रबल उम्मीदवार को मैदान मे उताने की जरूरत है वही उम्मीद भी जताई जा रही है की कांग्रेस एसे उम्मीदवार को मैदान मे उतारेगा जिससे बिल्हा के विधानसभा चुनाव मे घमाशान की स्थिति देखने मिलेगा ।
(एक बार भी नहीं मिला महिलाओ को टिकट)

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव मे अन्य सीटों के साथ ही बिल्हा भी एक ऐसा सीट है जो वर्ष 1962 मे अस्तिस्व मे आया तब से यहा लगभग 61 सालो मे एक बार भी महिलाओ को मौका नहीं मिल पाया है। सन 1962 मे यहा प्रथम विधायक के रूप मे कांग्रेस से चित्रकांत जायसवाल रहें जिन्होंने लगातार 6 बार चुनाव जीते जिसके बाद अशोक राव दो अलग पार्टी से दो बार विधायक रहें। सन 1998 के बाद से हर पांच वर्ष के लिए धरम लाल कौशिक तो सियाराम राम कौशिक को ही पार्टी अपना प्रबल दावेदार मान कर चुनाव मैदान मे उतारती रही हालाकी बिते चुनाव मे भाजपा के धरम लाल कौशिक व कांग्रेस से राजेंद्र शुक्ला मैदान मे थे अब इस वर्ष कांग्रेस के उम्मीदवार पर लोगो की नजरें टिकी हुई है।
(जिले के दो नक्से मे सामिल है बिल्हा विधानसभा)
छत्तीसगढ़ के बिल्हा विधानसभा ऐसी इकलौती सीट है जो दो जिलों के नक्शे में शामिल है इस सीट का क्षेत्र का आधे से ज्यादा हिस्सा मुंगेली जिले और एक हिस्सा बिलासपुर जिले में आता है। बिल्हा सीट बीते तीन चुनाव से बीजेपी के धरमलाल कौशिक और कांग्रेस के सियाराम कौशिक की रणभूमि बनी हुई है बिल्हा विधानसभा से भाजपा से धरमलाल कौशिक का चुनाव लड़ना लगभग तय था क्योंकि उनके अलावा किसी और को यहां मौका नहीं दिया जा सकता। लेकिन कांग्रेस के नेताओं में टिकट को लेकर दौड़ को देखते हुए कांग्रेस के पुराने समर्थक और आम जनता के बीच में काफी चर्चा देखने को मिल रहा है आखिर किसे मिलेगा टिकट और कौन बनेगा विधायक प्रत्याशी या फिर कांग्रेस के आपसी मतभेद को लेकर क्या फिर से भाजपा का विधायक बनेगा इस पर सवाल उठ रहे हैं।
(प्रत्याशी चयनित नहीं होने के कारण कांग्रेस चुनाव प्रचार मे पिछे) कांग्रेस को छोड़ सभी प्रमुख पार्टियों ने अपना प्रत्यासी चुनाव मैदान मे उतार दिया है जो चुनाव प्रचार के साथ ही मतदाताओ को रुझाने मे जुट गए है। जबकि कांग्रेस के ओर से अभी तक अपना प्रत्यासी की घोषणा नहीं की गई है एसे मे भाजपा,आम आदमी पार्टी सहित अन्य के प्रत्यासी को चुनाव के लिए प्रचार प्रसार करने मे काफी समय मिल गया है परन्तु कांग्रेस के लिए समय काफी कम है। हालाकी इस बार महिला व पुरुष मुख्य रूप से राजेंद्र शुक्ला,प्रमोद नायक, जागेश्वरी वर्मा,अंबालिका साहू, लक्ष्मी नाथ साहू,पूर्व विधायक सियाराम कौशिक की बहू गीतांजलि कौशिक,पुष्पेंद्र साहु जैसे और भी दिग्गज नेता कांग्रेस से बिल्हा विधानसभा टिकट के दौड़ में दिखाई दे रहे हैं।

