कन्हैया कौशिक -{बिलासपुर}
– आखिर किसके कब्जे में होगा बिल्हा विधानसभा कौन होगा महानायक।
– रिपीट हुए विधायक तो वर्षो की परम्परा पर लगेगा ग्रहण।
– मंदिर में माथे टेकने के बाद अब सांसे थाम कर बैठे है प्रत्यासी।
बिल्हा – विधानसभा बिल्हा में दो दिग्गज नेता के बीच महासंग्राम बहुत ही कड़े मुकाबले के बीच थमते हुए जनता द्वारा दिया गया जनादेश ईवीएम में लॉक हो गया है अब व्यापारी हो या नौकरी पेशा सहित आम नागरिक सभी अपने ही दिए मतों के फैसले के इंतजार कर रहा है जिसका फैसला आगामी तीन दिसंबर को हो जाएगा । बिते दिनों राज्य में दूसरे चरण का विधानसभा चुनाव सम्पन्न कराया गया हालाकी जिस तरह जिला प्रशासन द्वारा लोगो को कई तरिके से सत प्रतिशत मतदान के प्रति जागरूक किया ठीक उससे विपरीत इस बार लोगो ने अपने मता अधिकार का उपयोग किया सभी विधानसभा के साथ ही बिल्हा का मतदान 62 प्रतिशत पर सिमट कर रहा गया। मतदाताओं के ज्ञान विवेक पर अगर पूरा भरोसा किया जाए तो उन्होंने अपने हक में जिस नेतृत्व को चुना होगा इसका फैसला 3 दिसंबर को घोषित हो जाएगा। ठंड का मौषम शुरू हो गया है लोग सुबह उठ कर लावा में हाथ सेकने के साथ ही राजनीती माहौल गमगीन होता नजर आ रहा है। दोनों ही पार्टी के प्रत्यासियो के साथ ही कांटेदार मुकाबले के इस चुनाव से जुड़े हर छोटे बड़े चुनावी कलाकारों के साथ ही उन लोगों की धड़कनें भी बढ़ी हुई है जिन्होंने चुनावी चूल्हे में पकने के लिए चढ़े सियासती व्यंजन का महक सूंघने के साथ ही स्वाद चखा है। जिन्होंने बड़े-बड़े दावे करके सियासी योद्धाओं के तिजोरियों से पोटलिया लेकर निकले हैं उनकी तो सबसे ज्यादा धुकुर पुकुर हो रही है कहीं इसका असर ईवीएम से बाहर नहीं निकला तब तो फिर जो कनबुच्ची लगना है इसकी कई लोगों ने रिहर्सल भी कर लिया है वही कुछ अपना दोष दूसरे के मत्थे थोपने को चेहरा ढूंढ रखे है परिणाम आने के बाद सब सामने होगा ।
(कोई बन गए ज्योतिष तो कोई मानो घुसा हो ईवीएम में)
3 दिसंबर की तारीख जो कि महज 3
दिन दूर है पर उसके इंतजार का एक
एक पल काटे नहीं कट रहा है ऐसे में
कई लोग ज्योतिष बन गए है। तो कोई
मानो ईवीएम मशीन के अंदर से घुसकर ही मतदान के आंकड़े और प्रतिशत को निकाल कर बिल्हा विधानसभा की धरा में चौसर की बाजी पर शकुनि के पांसे की तरह बिखेर दिया है। कई चुनावी जंतर मंत्रर बैगाओ की माने तो उन्होंने तो जैसे ईवीएम से पहले ही क्षेत्र के मतदाताओं को गिन कर बैठ गए हैं जो दोनों पार्टी में से किसी न किसी को भारी मतो से जितने का दावा कर रहें है ।

( बिल्हा में चर्चा के साथ लोगो का मानना ए भी है )
बिल्हा विधानसभा क्षेत्र में यह माना जाता है कि जिस पक्ष का विधायक बनता है प्रदेश में उसकी सत्ता नहीं रहती और जिसकी सत्ता रहती है उसका विधायक नहीं रहता यह क्रम पिछले कुछ चुनाओं से निरंतर बना हुआ है। एसे में कही न कही पार्टी के दोनों ही दलों को यह चिंता भी सता रही है इनके गले से निवाला भी निचे नहीं निकल रही है डर सता रही है की प्रदेश में सरकार उनकी हुई तो विधायक विपक्ष का होगा या विधायक पक्ष का आया तो सरकार विपक्ष की बन जाएगी देखना होगा आगे क्या होता है।
(दडहा मतदान केंद्र से बैरंग लौटे थे मतदान टीम परिणाम पर पड़ेगा असर)
सड़क की मांग को लेकर नगर पंचायत बोदरी के वार्ड 10 के 960 मतदाताओ ने अपने मता अधिकार का रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे के साथ मतदान बहिस्कार कर दिया। जबकी इस वार्ड से महज कुछ ही दुरी में दोनों ही पार्टियों प्रमुख का न केवल आशियाना बल्कि दोनों गाँव से पुराना तालूक भी है जो पहले भी इन्ही प्रत्यासियों को अपना मत देते थे। परन्तु इस बार यहा मतदान नहीं डला अगर इस बार थोड़े बहुत आंकड़े से कोई मतदान हारता या जीतता है तो उन्हें जरूर फर्क पड़ेगा जिन्हे पहले यहा से अधिक मत मिलता रहा हो।

{ तुम्हारी भी जय अपनी भी जय जय }
इस विधानसभा में कुछ एसे चेहरे भी है जिन्होंने अपने ही नेता को मात देने दूसरे नेता से गठबंधन कर अंदर से किसी का हित तो किसी के लिए निहित कर लिए है जिसकी जानकरी मिलने के बाद प्रत्यासी ने उस भरोषा का काबिल ही नहीं समझा या यु कहे क्षेत्र की बाग़ दौड़ अन्य को थमा दिए। अब सामने वाला अपने प्रत्यासी के प्रति कितना ईमानदार है और उस इलाके से उनके नेता को कितना मत मिला ए 3 तय हो जाएगा अभी कुछ एसे लोग भी है जो सामने से नहीं परन्तु दोनों ही प्रत्यासी से सम्पर्क बनाए है।

