कन्हैया कौशिक – बिलासपुर
बिलासपुर जिले की बिल्हा विधानसभा सीट प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण सीट माना जाता है। यहां बीते कई कार्यकाल से भाजपा के दिग्गज नेता धरमलाल कौशिक चुनाव लड़ते आए हैं वर्तमान में भी इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा है। भाजपा के दिग्गज नेता धरमलाल कौशिक यहां से विधायक हैं और इस बार भी पार्टी ने उनके ऊपर भरोसा जताया है। विधायक रहते हुए धरमलाल कौशिक विधानसभा अध्यक्ष,भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। लेकिन बिल्हा विधानसभा सीट की एक तासीर ये भी है कि यहां की जनता दोनों प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा को बराबर मौका देती है जबकि इस बार तीसरे मोर्चे के तौर पर आम आदमी पार्टी ने भी यहां से पार्टी के जसबीर सिंह को अपना कैंडिडेट घोषित किया है जो दोनों पार्टियों के मुकाबले लोगो तक अपनी पकड़ बनाने मे दमखम लगा रहें है पहले के चुनाव की तुलना में इस बार बिल्हा विधानसभा में समीकरण कुछ हद तक बदले हुए नजर आ रहा हैं।बिल्हा विधानसभा दो जिलों का सीमावर्ती विधानसभा क्षेत्र है। बिलासपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के साथ मुंगेली जिले का पथरिया और सरगांव ब्लॉक का इलाका भी इसी विधानसभा में आता है।

{1962 से 2023 बिल्हा के राजनीतिक इतिहास}
1962 से 1985 तक लगातार कांग्रेस के चित्रकांत जायसवाल ने यहां पर पार्टी का झंडा बुलंद किया, लेकिन 1990 में अशोक राव ने कांग्रेस से बगावत की और जनता दल की टिकट पर चुनाव लड़कर यहां कांग्रेस के चित्रकांत जायसवाल को मात दी। हालांकि 1993 में अशोक राव दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गए और बीजेपी के धरमलाल कौशिक को हराया। 1998 में पहली बार यहां से धरमलाल कौशिक ने बीजेपी का झंडा बुलंद किया, लेकिन 2003 में वे अपनी सीट बचाने में नाकाम रहे। उन्हें कांग्रेस के सियाराम कौशिक ने मात दी। 2008 में धरमलाल कौशिक ने सियाराम कौशिक को फिर से मात दी। 2013 में एक बार फिर कांग्रेस ने सियाराम कौशिक पर भरोसा जताया और वो विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक को हराने में सफल हुए। इस चुनाव में बीजेपी को जहां 72,630 वोट मिले तो कांग्रेस को 83,598 वोट मिले। इस तरह जीत का अंतर 10,968 वोटों का रहा। 2018 के चुनाव में फिर समीकरण बदले। कांग्रेस का दामन छोड़कर सियाराम कौशिक जोगी कांग्रेस से चुनाव मैदान में उतरे, जिसके जवाब में कांग्रेस ने राजेंद्र शुक्ला को अपना प्रत्याशी बनाया। त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा के धरमलाल कौशिक एक बार फिर कांग्रेस और जोगी कांग्रेस को शिकस्त देने में कामयाब हो गए। बीजेपी के धरमलाल कौशिक को 84,431 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के राजेंद्र शुक्ला को 57,907 वोट मिले। पूर्व विधायक व जोगी कांग्रेस प्रत्याशी सियाराम कौशिक करीब 31 हजार वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रह।
{सड़क नाली पानी बिगाड़ सकता है चुनावी समीकरण}
बिल्हा से जुड़े ग्रामीण इलाको मे कुछ खाशा विकास होता नजर नहीं आया जिसके चलते यहा की जनता थोड़ा बहुत दोनों ही पार्टियों के प्रमुखो से नाराज है वही देखा जाए तो कुछ एसे नेता भी है जो अब लोगो से सम्पर्क बना रहें है। जबकी पिछले 5 वर्षो तक किसी से सम्पर्क नहीं बनाए एक ओर यह दिक्क़त भी इस चुनाव मे दिख सकता है जबकी कुछ इलाको सहित ग्रामों मे चुनाव बहिष्कार से भी यहा के नेताओ को दो चार होना पड़ेगा जिसका सीधा असर प्रत्यासीओ के जीत हार मे दिखाई देगा ।
{वायदे के साथ मतदाताओ तक पहुंच रहें योजना के फ़ार्म } विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही दोनों ही पार्टियों ने वायदे क पिटारा खोल.दिया है कुछ मतदाता इसे चुनावी हथकंडा मान रहें है तो अधिकांश फ़ार्म भरकर जमा करते दिखाई दे रहें है भाजपा ने जहाँ महतारी वंदन योजना के तहत हर विवाहित महिला को साल मे 12000 देने का दावा कर रहें है वही कांग्रेस ने भी गृह लक्ष्मी योजना के तहत हर साल 15000 देने का दावा किया है अब देखना होगा इस हथकंडे से दोनों ही पार्टी लोगो को कितना प्रभावित करता है।

{ बिल्हा में मतदाताओ की कुल संख्या }
बिल्हा विधानसभा में कुल 305982 मतदाता हैं। इनमें से 151943 महिला और 154027 पुरुष मतदाता हैं। वहीं, 8905 युवा मतदाता हैं, जिनकी उम्र 18 से 19 साल है। बिल्हा विधासभा में कुल आबादी करीब साढ़े चार लाख है। एससी और आदिवासी मतदाताओ की यहां बड़ी मौजूदगी है। यह ओबीसी बाहुल विधानसभा है इसमें करीब 45 फीसदी ओबीसी वर्ग के मतदाता हैं जिसमें कुर्मी, साहू,लोधी और यादव समाजा भी शामिल हैं वहीं, करीब 25 फीसदी हरिजन व आदिवासी और 30 फीसदी ठाकुर-ब्राह्मण वोटर हैं।
{आखिर किसके सर होगा विधायक का ताज़} विधानसभा के मतदाताओ की माने तो उन्हें आज भी कई विकट समस्या से गुजरना पड़ रहा है जिसमे सबसे अहम नाली पानी सड़क व स्वास्थ्य प्रमुख है शासन कांग्रेस के साथ ही भाजपा का रहा परन्तु अधिकांश विकाश कार्य मे सिर्फ भारी भरकम पैसे की बर्बादी की छाप छोड़ दी जिसका जीता जगता नमूना आज कई ग्राम मे उप स्वास्थ्य केंद्र की बिल्डिंग है जो उपयोग मे लाए बिना ही खंडहर मे तब्दील हो चुकी है।ग्रामों की सड़क नालियो के नहीं होने से स्वम नाली का हिस्सा बन चुकी है लोग इस बार क्या करें क्या न करें की समस्या से भी गुजर रहें है हालाकी अब चुनाव मे सिर्फ दो दिन शेष है जिसके बाद जनता जनार्दन के मत पर प्रत्यासियो के सर पर ताज़ होगा।


