बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक मजबूती उसके भौतिक आधारभूत ढांचे से नहीं, बल्कि निष्पक्षता, विश्वास, प्रतिबद्धता और न्याय के प्रति निष्ठा से होती है। उन्होंने न्यायाधीशों, अधिकारियों और कर्मचारियों से संस्थागत मूल्यों एवं विश्वास को बनाए रखने का आह्वान किया।

अपने संबोधन में न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि पद और जिम्मेदारियां अस्थायी होती हैं, लेकिन संस्थाएं स्थायी रहनी चाहिए। हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी एक ऐसी सशक्त संस्था को पीछे छोड़कर जाना है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार बने।
समारोह में महाधिवक्ता सहित अन्य वक्ताओं ने न्यायमूर्ति सिन्हा के न्यायिक योगदान, नेतृत्व और सेवाओं की सराहना की। महाधिवक्ता ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश बनने से पहले न्यायमूर्ति सिन्हा करीब 1,34,200 निर्णय दे चुके थे। वहीं 29 मार्च 2023 से 1 सितंबर 2026 तक उनके कार्यकाल में कुल 50,228 मामलों का निराकरण किया गया। इनमें एकल पीठ के 32,600 तथा खंडपीठ के 17,628 मामले शामिल हैं।
इसके अलावा न्यायमूर्ति सिन्हा ने 369 से अधिक रिपोर्टेड एएफआर निर्णयों के माध्यम से राज्य के न्यायिक विधिशास्त्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
समारोह में हाईकोर्ट के न्यायाधीशगण, रजिस्ट्रार जनरल एवं रजिस्ट्री के अधिकारी-कर्मचारी, राज्य न्यायिक अकादमी के अधिकारी, अधिवक्तागण तथा न्यायिक बिरादरी के सदस्य उपस्थित रहे।

