बिलासपुर। कोनी थाना क्षेत्र में ट्रेलर वाहनों से डीजल चोरी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के मामले ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। डीजल चोरी से अधिक चर्चा अब पुलिस की कार्रवाई को लेकर हो रही है। मामले में गंभीर अनियमितता सामने आने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने सहायक उपनिरीक्षक (ASI) उमेश उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र संबद्ध कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की प्रारंभिक जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
पुलिस ने 12 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया था कि गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है, जबकि तीन आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए। पुलिस ने दो स्कॉर्पियो वाहन, लगभग 200 लीटर चोरी का डीजल, पाइप और अन्य उपकरण जब्त करने की जानकारी भी दी थी।
👉गांव से सामने आई अलग कहानी
मामला तब पलट गया जब भदौरियाखार (बरपाली) गांव से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। ग्रामीणों के अनुसार पुलिस ने बैसाखू लोनिया, उसके पुत्र राजू लोनिया, राजेश लोनिया, भानु लोनिया, हरनारायण लोनिया सहित अन्य लोगों को घर से हिरासत में लेकर हथकड़ी लगाकर थाने पहुंचाया था। आरोप है कि सभी को रातभर थाने में रखा गया, लेकिन रविवार सुबह बैसाखू, राजू और निलेश को छोड़ दिया गया। बाद में केवल भानु लोनिया और शिवप्रसाद उर्फ छोटू लोनिया को आरोपी बनाकर जेल भेजा गया, जबकि छोड़े गए लोगों को प्रेस विज्ञप्ति में फरार बताया गया।
👉 वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी जानकारी
एसएसपी कार्यालय से जारी निलंबन आदेश में उल्लेख किया गया है कि विवेचक सउनि उमेश उपाध्याय ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार करने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी और तीन आरोपियों को छोड़ दिया। इसे संदिग्ध आचरण, कर्तव्य में गंभीर लापरवाही एवं पुलिस की छवि धूमिल करने वाला कृत्य मानते हुए तत्काल निलंबन की कार्रवाई की गई।
👉 लेनदेन के आरोपों ने बढ़ाई गंभीरता
पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि कथित लेनदेन के बाद आरोपियों को छोड़ा गया और रिकॉर्ड में उन्हें फरार दर्शा दिया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन प्रारंभिक जांच शुरू होने के बाद मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
✍️ यह मामला अब केवल डीजल चोरी तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल यह है कि यदि आरोपियों को वास्तव में हिरासत में लिया गया था, तो उन्हें छोड़ने का निर्णय किसके निर्देश पर हुआ? प्रेस विज्ञप्ति और वास्तविक कार्रवाई में विरोधाभास क्यों है? प्रारंभिक जांच के बाद इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी है, लेकिन फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

