– क्षेत्रीय पर्यावरण विभाग की अनदेखी का दंश झेल रहें ग्रामीण।
– कारखानों के हाँफर चिमनी उगल रही जहर लोगों के स्वास्थ्य पर बूरा असर।
– चौबीसो घंटे उगल रहा रात्रि मे पुरे क्षेत्र डस्ट रूपी कोहरे मे तब्दील।
– तीन नामजद कारखाने जिसकी लगातार हो रही शिकायत बावजूद नही हो रही कार्रवाई।
बिलासपुर / औद्योगिक क्षेत्र सिलपहरी मे कुछ कारखानो के चिमनीयों से निकलने वाले कोयले के डस्ट से ग्रामीणों मे त्राहिमाम मची हुई है। जनसुनवाई मे जिन कारखानो ने अधिकारियो और ग्रामीणों के समक्ष चिमनियों व हांफरो से जरा भी डस्ट नही निकलने का दावा किया था वर्तमान मे यहां चौबीसो घंटे उड़ते डस्ट के चलते सांस लेना मुश्किल हो गया है। किसानो के सब्जी तरकारी की फसले बर्बाद हो रही है वही लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। शासन जिन कारखानों के होने से क्षेत्र मे विकास की गति बढ़ने का दावा करता है वही कारखानो से निकलने वाला डस्ट हवा मे घुलकर क्षेत्र के लिए विनाश का कारण बन रहा है। कारखानों के प्रबंधक नियम की धज्जियाँ उड़ाने मे कोई कसर नही छोड़ रहें है इनसे कुछ कारखाना प्रबंधक भी हलाकान है कुछ ने तो कारखाना लगाना ही छोड़ दिए।

(नचिकेता स्टील सिलपहरी)
ग्रामीणों सहित कुछ कारखाना प्रबंधक ने लगातार बढ़ती इस परेशानी से कई दफा जिला कलेक्टर सहित पर्यावरण प्रदूषण विभाग को ज्ञापन सौपे परन्तु आज तक इनपर कोई कार्रवाई नही की गई। न ही कारखाना मालिक इसकी रोकथाम को लेकर जरा भी सक्रियता बरत रहा है इस संबंध मे जब हमने क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी रश्मि श्रीवास्तव से सम्पर्क किया तो उनके द्वारा संतोष जनक जवाब नही दिया गया इससे स्पष्ट है की इन सभी गतिविधि से विभागीय अधिकारी अनजान नही है शायद इन्हे भी ग्रामीणों की इस विकट समस्या से कोई लेना देना नही है। 
(कारखाने के बाउंड्री से कही ऊपर कोयला डंप मशीन कवरिंग नही) जानकारी के मुताबिक सिलपहरी मे अधिकांश स्पंज आयरन है। यहां बाउंड्रीवाल से भी ऊंचा कोयले को डंप करवाया गया है। इनके द्वारा कन्वेयर बेल्ट,मशीनों को भी कवरिंग नही कराया गया है साथ ही कोयले के डस्ट को दबाने नियमित पानी का छिड़काव नही कराया जा रहा है। न ही कारखानों मे ईएसपी फिल्टर प्लांट लगाया गया है अगर लगा भी है तो उसे बाईपास कर पर्यावरण मे जहर परोसा जा रहा है।
(डस्ट बना जी का काल एक किलोमीटर तक लोग प्रभावित)
उक्त कारखानों से निकलने वाले डस्ट से न केवल काम करने वाले मजदूर बल्कि एक किलोमीटर तक बसे गांव सिलपहरी,कोरमी, हरदी,बसिया,हरदी कला टोन,धुमा,सिरगिट्टी बन्नाक डीह सहित दर्जनों गांव के ग्रामीण इससे प्रभावित है लोगों को सांस लेने मे दिक्क़त के साथ ही आँखों मे जलन के साथ ही कई परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। यहां किसानो के फसल डस्ट से बर्बाद हो रहा है साथ ही जमीन बंजर होता जा रहा है।
(राजनीति से जुड़े लोगों ने ले रखा है ठेका )
सिलपहरी के जिन कारखानों के हाफरो, चिमनीयों से डस्ट निकलकर ग्रामीणों के लिए काल बन गया है दरअसल इन कारखानों मे कई स्थानीय राजनीति से जुड़े लोग या तो स्वयं नही तो अपने रिस्तेदारो को वहां कार्य मे लगा दिए है। सूत्रों की माने तो डस्ट फैलाने के एवज मे इनके द्वारा कुछ सरपंचो के मुंह बंद करने के लिए गांव मे एक दो बोर करा दिए है यही कारण है की कुछ सरपंच व राजनीति से जुड़े लोग सब देखकर भी इनके विरोध से परहेज कर रहें है।

