छत्तीसगढ़ बिलासपुर / एक ट्रैक पर पहुंची मालगाड़ी और मेमू ट्रेन: एक ही ट्रैक पर पैसेंजर ट्रेन और मालगाड़ी के आने की जानकारी जैसे ही मेमू ट्रेन में बैठे मुसाफिरों की लगी वो घबरा गए। लोगों को लगा कि शायद फिर कोई हादसा न हो जाए कुछ लोग तो गाड़ी से नीचे भी उतरने लगे रेलवे ने तुरंत बताया कि घबराने की कोई जरुरत नहीं है। ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली के तहत ये ट्रैक बदलने की रूटीन प्रक्रिया है इस प्रक्रिया को वो पिछले कई सालों से फॉलो करते आ रहे हैं। रेलवे की ओर से जब ये जानकारी दी गई तो लोग वापस ट्रेन में बैठे और राहत की सांस ली। ये वाकया कोटमी सोनार और जयरामनगर के बीच में हुई. रेलवे अधिकारियों ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया। इसी तरह के कई मामले बिलासपुर रायपुर मार्ग पर सिरगिट्टी ओवर ब्रिज के नीचे देखी जा चुकी हैं।

वही छत्तीसगढ़ पुलिस ने सोमवार शाम बिलासपुर के पास हुई एक ट्रेन दुर्घटना की विस्तृत जांच शुरू करने का दावा किया है जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए। यह घटना अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ लापरवाही से मौत का कारण बनने और दूसरों की जान खतरे में डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद हुई है। अधिकारियों के अनुसार 4 नवंबर को बिलासपुर के लालखदान इलाके के पास एक स्थानीय मेमू यात्री ट्रेन एक खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई, जिससे महिलाओं के लिए आरक्षित एक डिब्बे सहित कई डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और कई लोग हताहत हुए।
ट्रेन के मृत चालक विद्या सागर के खिलाफ स्टेशन अधीक्षक निखलेश विठालकर ने तोरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। तोरवा थाना पुलिस ने ट्रेन चालक के खिलाफ बीएनएस की धारा 106 ए, 125 एवं रेलवे एक्ट की धारा 153, 154, 175 के तहत जुर्म दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बता दें कि 4 नवंबर को लालखदान क्षेत्र में रेल हादसा हुआ था जिसमें अभी तक अधिकृत तौर पर 11 यात्रियों की दर्दनाक मौत की पुष्टि हुई है। इसके अलावा 20 घायलों का इलाज जारी है।
✍️(ट्रेन हादसे से जुड़ी नई जानकारी सामने आई है)
ट्रेन हादसे के पीछे कई महत्वपूर्ण तथ्य रेल अधिकारियों के डाटा-बॉक्स के माध्यम से उजागर हुए हैं। हादसे के समय मेमू ट्रेन 76 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही थी। ट्रेन के लोको पायलट ने हादसे से पहले इमरजेंसी ब्रेक लगाया जिससे ट्रेन की रफ्तार कम हुई और बड़ा हादसा टल गया। रेल अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन ने 48 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से मालगाड़ी को टक्कर मारी। यदि लोको पायलट ने समय रहते ब्रेक नहीं लगाया होता तो यह दुर्घटना और भी गंभीर हो सकती थी। हादसे के डाटा-बॉक्स की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि लोको पायलट की त्वरित प्रतिक्रिया ने यात्रियों और माल दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की।

वही बिलासपुर के सहायक पुलिस अधीक्षक राजेंद्र जायसवाल ने बताया कि तोरवा थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106 (1) (लापरवाही से मौत) और 125 (ए) (दूसरों की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य) और रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। जायसवाल ने कहा, जांच पूरी होने के बाद ज़िम्मेदार पाए जाने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी।
(दर्द में मुनाफा घटना स्थल से बिलासपुर का किराया 200 से 500 तक वसुले)
जिस वक़्त यह भीषण हादसा हुआ लोगों में अफरा तफरी मच गई थी जिन लोगों के परिजन इस ट्रेन में सवार थे उनकी सांसे अटकी हुई थी सबको अपनो को सकुशल लौटने की आस थी। परन्तु कुछ ने अपनों को जख्मी पाया तो किसी ने अपने परिजनों का शव। यहां घटना के वक़्त कुछ लोगों ने इन्शानियत दिखाई घायलों को पानी पिलाई तो वही कुछ ऑटो चालकों ने लोगों के जेब से मनमाने ऑटो किराया वसूल ली उनके लिए यह आपदा नही अवसर बन गया।मदद की उम्मीद सौदेबाजी में बदला जा चुका था सवाल था ट्रेन से उतरे लोगों के घर वापसी का क्योंकि ट्रेन रुकी तो कईओ ने सफर अधूरा छोड़ दिया।
घटना के बाद, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख रुपये और मामूली रूप से घायल यात्रियों को 1 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी मृतकों के प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये का मुआवज़ा देने की घोषणा की।

