-बिलासपुर में भीषण रेल हादसा 12 की मौत 20 घायल, मृतकों की पहचान नाम और तस्वीरें आए सामने 10 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन।
-चीख-पुकार के बीच स्थानीय लोगो और बचाव दल ने घायलों को बाहर निकाल हॉस्पिटल पहुँचाया. इस भयंकर हादसे ने एक बार फिर रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिलासपुर // छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में मंगलवार सुबह हुई रेल दुर्घटना ने पूरे प्रदेश को गहरे शोक में डुबो दिया है। लाल खदान स्टेशन के पास गेवरारोड से बिलासपुर आ रही मेमू लोकल ट्रेन (गाड़ी संख्या 68733) और खड़ी मालगाड़ी के बीच जबरदस्त टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि मेमू ट्रेन का इंजन और पहला डिब्बा पूरी तरह से चकनाचूर हो गया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 12 यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मरने वालों में लोको पायलट, छात्रा और आम यात्री शामिल हैं।
– छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में मंगलवार सुबह हुई रेल दुर्घटना ने पूरे प्रदेश को गहरे शोक में डुबो दिया है। लाल खदान स्टेशन के पास गेवरारोड से बिलासपुर आ रही मेमू लोकल ट्रेन (गाड़ी संख्या 68733) और खड़ी मालगाड़ी के बीच जबरदस्त टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि मेमू ट्रेन का इंजन और पहला डिब्बा पूरी तरह से चकनाचूर हो गया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 12 यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मरने वालों में लोको पायलट, छात्रा और आम यात्री शामिल हैं।

(मृतकों की पहचान और परिजनों में मातम)
दुर्घटना में जिन 11 यात्रियों की मौत हुई, उनमें अब तक पांच की पहचान हो चुकी है। मृतकों के नाम हैं – विद्या सागर (लोको पायलट), प्रमिला वस्त्रकार, अंकित अग्रवाल, प्रिया चंद्रा और शीला यादव।
मृतका शीला यादव बिलासपुर के देवरी खुर्द इलाके में सतबहनिया मंदिर के पास रहती थीं। वहीं, प्रिया चंद्रा गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) की बीएससी फाइनल ईयर की छात्रा थीं और सक्ती जिले के बहेराडीह गांव की निवासी थीं। जैसे ही उनकी मौत की खबर गांव पहुंची, परिवार और दोस्तों के बीच मातम का माहौल छा गया। लोको पायलट विद्या सागर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सहायक लोको पायलट रश्मि राज गंभीर रूप से घायल हैं। उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। हादसे के दौरान मालगाड़ी के ट्रेन मैनेजर शैलेश चंद्रा ने सूझबूझ दिखाते हुए तेज़ रफ्तार से आती मेमू ट्रेन को देखकर कूदकर अपनी जान बचाई।

(10 घंटे तक चला राहत एवं बचाव अभियान)
हादसे के बाद रेलवे प्रशासन, एनडीआरएफ, जीआरपी, और स्थानीय पुलिस की टीमों ने मिलकर करीब 10 घंटे तक राहत और बचाव कार्य चलाया। भारी मशीनों और क्रेन की मदद से ट्रेन के मलबे को हटाया गया। रात भर चले इस अभियान में फंसे हुए यात्रियों को बाहर निकालने के लिए कोचों को काटना पड़ा। रात करीब 3 बजे तक सभी शवों को बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद रेलवे ट्रैक को क्लियर करने के लिए इंजीनियरों की टीम ने काम किया और बुधवार तड़के तक मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग पर यातायात पूरी तरह बहाल कर दिया गया।
(घायलों की सूची)
रेल हादसे में घायल हुए 20 यात्रियों की सूची भी सामने आई है। इनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
मथुरा भास्कर (55),चौरा भास्कर (50)
,शत्रुघ्न (50),गीता देबनाथ (30),मेहनिश खान (19),संजू विश्वकर्मा (35),सोनी यादव (25),संतोष हंसराज (60)
,रश्मि राज (34),ऋषि यादव (2 वर्ष) ,तुलाराम अग्रवाल (60),अराधना निषाद (16),मोहन शर्मा (29),अंजूला सिंह (49),शांता देवी गौतम (64),प्रीतम कुमार (18),शैलेश चंद्र (49)
,अशोक कुमार दीक्षित (54),नीरज देवांगन (53),राजेंद्र मारुति बिसारे (60) घायलों को बिलासपुर जिला अस्पताल और अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।
(सरकार और रेलवे की मुआवजा घोषणा)
रेलवे मंत्रालय ने हादसे में मारे गए यात्रियों के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख रुपये, और सामान्य घायलों को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया। सीएम ने कहा कि हादसे की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
(CRS स्तर पर जांच के आदेश)
इस दर्दनाक हादसे की जांच Commissioner of Railway Safety स्तर पर कराई जाएगी। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, हादसा गटौरा और बिलासपुर के बीच सिग्नलिंग सिस्टम या लाइन-स्विचिंग से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ी के कारण हुआ बताया जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी। रेलवे ने संबंधित तकनीकी अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
(फिर जहन में आई तारबाहर दर्दनाक दुर्घटना) शहर वाशियो को यह हादसा एक बार फिर बिलासपुर की ओ काली 2011 की रात याद दिला दी जब पटरीयों पर दो दर्जन से भी अधिक लोगों को मालगाड़ी ने अपनी चपेट में लिया था। अब भी नवंबर का महीना हैं जब यह भीषण हादसा हो गया जिन लोगों ने 2011 की घटना देखा उसे ओ मंजर एक बार फिर इस घटना ने दिखा दिया।
( शर्मसार करने वाले कृत्य) जब पीड़ित मदद की गुहार मांग रहें थे कई मानवता दिखाए कुछ ने अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों को बचाया। वही कुछ लोग एसे थे जों मदद करने की आड़ में पीड़ितों के ग़ले कान हाथो में पहने गहने तक को अपना निशाना बना लिए।
(प्रदेशभर में शोक की लहर)
बिलासपुर रेल हादसे की खबर फैलते ही प्रदेशभर में शोक की लहर दौड़ गई। स्टेशन और अस्पतालों में परिजनों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुख्यमंत्री, रेल मंत्री और डिप्टी सीएम ने देर रात राहत कार्यों की मॉनिटरिंग की। इस हादसे ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

