– बिते माह पार्षदो ने संबंधित विभाग सहित जिला कलेक्टर को सौपा था ज्ञापन।
– एक डॉक्टर व कुछ स्थाफ के भरोसे शहरी स्वास्थ्य केंद्र।
बिलासपुर सिरगिट्टी – जिला प्रशासन की टीम बिते कुछ दिनों से शहर से जुड़े ग्रामीण इलाको के स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर विशेष ध्यान रखे हुए है। उनके द्वारा बिते कुछ दिनों से ग्रामीण अस्पतालो का कायाकल्प व व्यवस्थाओ की जानकारी जुटाते हुए निरिक्षण किया जा रहा है। वही जिन अस्पतालो मे सुविधा की कमी नजर आ रही है वहाँ संबंधितो को व्यवस्था दुरुस्त करने निर्देश दी जा रही है। परन्तु शहर से लगे एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जिसे कुछ वर्ष पहले शहरी स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया था वहाँ की स्थिति व मरीजों को दवा व डॉक्टरो की कमी के चलते हो रही परेशानी की तरफ रुख मोड़ना संबंधित विभाग के साथ ही जिला प्रशासन मुनासिब नहीं समझ रहें है। जबकि इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर निगम के तीनो वार्डो के मरीजों के साथ ही उससे जुड़े कई ग्रामीण इलाकों के मरीज इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है। हम नगर निगम सिरगिट्टी के वार्ड क्रमांक 10 स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बात कर रहें है जिस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को कुछ वर्ष पहले ही शहरी स्वास्थ्य केंद्र मे विलय करने से क्षेत्र की जनता को उम्मीद थी की इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को शहरी स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिए जाने के बाद यहां भी शहर की तरह ही सुविधाए लोगो को मिलेगी परन्तु लोगो की यह आस निराश मे बदल गई दरअसल यहां ओ सभी सुविधाए अछूता साबित हुई यहां न तो स्टाप की कमी पुरी हुई न ही दवाईयो का आभाव खत्म हुआ। लिहाजा हर मरीज को यहां कुछ दवा मिल पाता है तो कुछ दवा बाहर से लेना पड़ता है स्थिति यह है की यहां गर्भवती माता बहनों के डिलीवरी मे राहत पहुंचाने वाले महत्वपूर्ण इंजेक्शन सहित कैल्शियम की ना तो टैबलेट है न हीं सिरप है यहां की स्थिति से निगम के वार्ड पार्षद एमआईसी केशरी इंगोले सहित पार्षद पुष्पेंद्र साहु ने दवाइयां व स्टाफ की कमी से संबंधित विभाग के साथ ही जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौपा है। बावजूद इस तरफ कोई सुध लेने वाला नहीं है लिहाजा कई मरीज अब यहां आने से कतराते है जो मजबूर होकर क्षेत्र के अन्य डॉक्टरो के दरवाजे खटखटाने मजबूर है।

(दवाइंया नहीं,स्टाफ के आभाव से जूझ रहा अस्पताल) सिरगिट्टी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मे जरूरी दवाइयां जैसे कुत्ते के काटने पर लगाने वाले इंजेक्शन के साथ -सेफेट्रिएक्सोन, एंटीबायोटिक्स,ऑक्सीटोसिन,डेक्सोना
,एमिकासिन ,पेंट्राजोल
– टैबलेट एमोक्सिसिलिन 500 एम.जी,टैबलेट एज़िथ्रोमाइसिन 500 एम.जी,जिंक ,टैबलेट डिक्लोफेनाक, टैबलेट इब्रुफेन,टैबलेट ड्रोटाविन ,बैंडेज,पैटी,कैटगट,लिक्विड पैराफिन,सिरप लैक्टोलोज,सिरप खांसी,सिरप एंटासिड,सूप मल्टीविटामिन,सिरप कैल्शियम, टैबलेट ,कैप्सूल ओमेप्राज़ोल, सिरिंज,सिरप अल्कासेट्रियन ,टैबलेट माला-एन,कान की दवा का आभाव है।

(शहरी स्वास्थ्य केंद्र मे होने वाली कोई सुविधा नहीं)
शहरी स्वास्थ्य केंद्र मे जिस तरह से स्टाफ रहता है यहां ओ भी नहीं है पुरा अस्पताल एक डॉक्टर व कुछ नर्स के भरोसे है जबकि शहरी स्वास्थ्य केंद्र में दो महीला,पुरुष डॉक्टर,तीन नर्स, एक ड्रेसर, एक फार्मासिस्ट, एक एएनएम, एक वार्ड बाय, तीन आया, एक लैब तकनीशियन रहते है परन्तु यहां एक डॉक्टर है, ड्रेसर व लैब तकनीशियन नहीं स्टाफ नर्स दो स्टाफ नर्स व एक आया के भरोसे पुरा अस्पताल है।


(दीवारों पर दरार,वाटर फ़िल्टर चालू नहीं)
उक्त अस्पताल स्वयं बीमार होता नजर आ रहा है यहां मरोजो के बैठने हेतु बने प्रतीक्षा कक्ष मे लगे टाइल्स जगह जगह से टूट व जमीन पर धस चुकी है,मुख्य डॉक्टर के आफिस का दीवार दरार खा चुकी है,यहां स्ट्रेचर जर्जर हालात मे पड़ा हुआ है,कुछ वर्ष पूर्व लोगो को आरो शुद्ध व ठंडा पानी मिले इस उद्देश्य से लाए गए वाटर फ़िल्टर मशीन बिना चालू अस्पताल का शोभा बढ़ा रहा है, यहां लगे खिड़किया टूट चुकी है, रात्रि मे आने वाले मरीज व स्टॉफ मच्छरों के आगे लाचार व विवश दिखाई देते है।

