– हल्दी कुमकुम से तैयार होती है मां की मनोहारी प्रतिमा।
– सिरगिट्टी के पोटर खोली मे 22 वर्षो से हो रही माता की पुजा।
– पुजा मे बच्चों व महिलाओ के उत्साहवर्धन के लिए कराया जाता है लक्की ड्रा।
बिलासपुर – श्री सोलापुरी माता उत्सव की छटा पिछले 25 वर्षो से बिलासपुर मे भी भव्य रूप लेते हुए नजर आ रही है। जिले में रहने वाले दक्षिण भारतीय लोग खास तरीके से 7 से 9 दिनों तक माता की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान हर दिन देवी की अलग अलग रूपों को दर्शाते हुए हल्दी,चंदन और कुमकुम से मां का मनोहारी श्रृंगार किया जाता है। अब इस पुजा उत्सव मे सिर्फ दक्षिण भारतीय समुदाय के लोग नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के लोग भी सामिल हो रहें है। देखते ही देखते बिलासपुर शहर मे इस पुजा का आयोजन 25 वर्ष की ओर अग्रसर है वही सिरगिट्टी स्थित पोटर खोली मे इस आयोजन का 22 वा वर्ष है राटा पुजा के साथ शुरू होने वाली इस पावन पुजा का समापन भव्य शोभायात्रा व माता विषर्जन के साथ किया जाता है।

भारतीय परम्परा मे जिस तरह नवरात्रि का बड़ा ही महत्व होता है ठीक उसी प्रकार दक्षिण भारतीय समुदाय के लिए माँ सोलापुरी पुजा होता है। खड़कपुर का यह पुजा अब बिलासपुर मे भी कई जगह पुरे भक्तिभाव के साथ किया जाता है बिलासपुर मे इसकी शुरुआत सन 2000 मे हुई थी जिसके बाद इसे निरंतर जारी रखा गया है। पहले यह पुजा सिर्फ एक स्थान पर की जाती थी परन्तु अब इसकी छटा बिलासपुर के कई स्थानों पर देखी जा सकती है। सिरगिट्टी इलाके मे यह पुजा पोटर खोली के साथ ही शुभम विहार मे की जाती है राटा पुजा व भैरव बाबा की पुजा अर्चना से शुरू हुई इस पुजा मे हर दिन गीली हल्दी व कुमुकम से माता का न केवल प्रतिमा तैयार की जाती है बल्कि उनका श्रृंगार भी इसी से किया जाता है। इस पुजा मे निम की पत्ती का भी विशेष महत्व रहता है जिसे माता के चारो तरफ सजाया व रखा जाता है व शितला माता पुजा के दौरान तुलसी के पत्ते के साथ ही निम पत्ती की पुजा की जाती है। माता का पंडाल भी आकर्षक सजाया जाता है सोलापुरी माता पुजा को सम्पन्न कराने वाले भी खड़कपुर से अपने पूरे टीम के साथ आते है। जो अपने साथ पुजा मे बजने वाले डफली व वाध्य यंत्र साथ लाते है इनके द्वारा पुजा शुरू से समापन तक उपवास रहते है यहां होने वाली पुजा हिन्दू देवी देवताओं की ही पुजा है जिनका नाम वहाँ के बोल चाल के भाषा मे रखा गया है

(मान्यता हल्दी लेप से चिकन पॉक्स की समस्या दूर)
माता सोलापुरी की पूजा करने का विशेष महत्व है गर्मी में बढ़ते तापमान के कारण बच्चे और युवा अक्सर चिकन पॉक्स की चपेट में आ जाते हैं। इस बीमारी से छुटकारा दिलाने के लिए माता की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जब मां को विराजित कराया जाता है तभी से मौसम में हल्की ठंडक आ जाती है। कई लोग देवी के शरीर में लगे हल्दी का लेप अपने शरीर पर लगाते हैं। लोगों का मानना है कि ऐसा करने से चिकन पॉक्स का उन पर असन नहीं होता।


(उत्सव में हल्दी व उसके पानी का है खास महत्व)
सोलापुरी माता की पूजा में हल्दी का अलग की महत्व होता है हल्दी से देवी का स्वरूप तैयार किया जाता है माता का श्रृंगार भी हल्दी से होता है। प्रत्येक दिन की पूजा में भी हल्दी का इस्तेमाल होता है पूजा करने वाले पंडित से लेकर उनके साथ रहने वाले बटुक इसी हल्दी का लेप पूरे शरीर में लगा कर पूजा करते हैं ये बटुक पुजारी का सहयोग करते हैं इसलिए इन्हें भी हल्दी लगाई जाती है। पुजा मे कुमकुम पूजा भी की जाती है जिसमे महिलाए सामिल होकर तीन घंटे तक निर्जला उपवास रहकर अपने परिवार की सुख समृद्धि की कामना करते है।।
(पोटर खोली मे पुजा आयोजन जुटे समिति)

इस पूजा महोत्सव को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष पी.देवराजू सदस्य एम.श्रीनू राव, डी. राजा राव,के.वेंकट राव (नानी ), पी.शेखर राव,एम.प्रफूल,एन.संतोष कुमार,बी. रमेश कुमार,अकलेश कुमार,जी.के. राव, के.माधव राव,जगदीश,बबलू सोनानी, ईश्वर राव,धीरज कुमार ,एन.सुरेश कुमार ,शिवा,सुशांत,डी अप्पा, आयुष, सागर, राव, गोविंदा, पी. नागभूषण राव,कुणाल,धनराज ,समस्त सदस्य गण का सहयोग रहता है ।

