– व्रतियों ने परणा कर तोड़ा 36 घंटे का निर्जला व्रत।
– मदिर घाट के साथ ही घरो मे गूँजता रहा छठी माई के गीत।
– विगत 14 वर्षो से भव्य आयोजन करते आ रहें छठ पूजा आयोजन समिति।
बिलासपुर सिरगिट्टी – नहाय खाय से शुरू हुए आस्था के महापर्व छठ पूजा पर्व का उगते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ समापन हो गया। छठ व्रत के चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद इस व्रत के पारण का विधान किया गया व्रतियों ने 36 घंटे के बाद अन्न जल ग्रहण किया। चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन तप और व्रत के माध्यम से हर साधक अपने घर-परिवार और विशेष रूप से अपनी संतान की मंगलमय कामना की। इस दौरान सिरगिट्टी स्थित त्रिपुर सुंदरी मरीमाई मंदिर घाट पर शुक्रवार के तड़के से ही लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

दिवाली के बाद इस आयोजन में दूसरी दिवाली की झलक नजर आई जहाँ खूब आतिशबाजी के साथ ही मेले जैसा महौल रहा। भक्ति और लोक आस्था के सूर्योपासना पर्व पर श्रद्धालू सूर्य के उदय होने का बेसब्री से इंतजार करते हुए कोई घुटनों तो कोई कमर भर पानी में घंटों तक खड़े रहे। जैसे ही सूर्यदेव का उदय हुआ पूरा घाट सूर्य देव व छठी मैया के जयकारों से गूंज उठा। सूर्य के दर्शन देते ही व्रतियों ने उन्हें जल और दूध से अर्घ्य दिए आरती उतारी सौंधी सौंधी पकवान की खुशबु से घाट महक उठा।

सभी एक दूसरे को इस पावन पर्व की बधाई देते हुए छठी मैया के प्रसाद वितरण किए। महिलाएं भी झोली फैलाकर प्रसाद प्राप्त की। छठ पूजा महोत्सव समिति के द्वारा किए गए इस भव्य आयोजन में प्रतिदिन संध्या व शाम कालीन मां गंगा,बजरंगबली व भगवान भास्कर की मंगलमय आरती की गई पूजा के अंतिम दिन आरती मे राजेंद्र शुक्ला सपरिवार पहुँचे जहाँ पार्षद अजय यादव भी शामिल हुए।

(संतान प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है छठ पर्व)
छठ पूजा के दौरान विवाहित महिलाओं ने भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर संस्कारवान और स्वस्थ संतान प्राप्ति के लिए भगवान राम और सूयर्देव से प्रार्थना की। ऐसा माना जाता कि संतान प्राप्ति के लिए छठ पर्व का बड़ा महत्व है। कहते हैं इस व्रत से संतान सुख प्राप्त होता है वहीं जब पांडव राजपाट गंवाकर वन-वन भटक रहे थे तब भी द्रौपदी ने संतान प्राप्ति के लिए छठ पूजा की थी।

(छठ पूजा का आध्यात्मिक महत्व)
भले ही दुनिया कहती है कि जो उदय हुआ है उसका डूबना तय है लेकिन लोक आस्था के छठपर्व में पहले डूबते और बाद में दूसरे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने का यही संदेश है कि जो डूबा है उसका उदय होना भी निश्चित है। इसलिए विपरीत परिस्थितियों से घबराने के बजाय धैर्यपूर्वक अपना कर्म करते हुए अपने अच्छे दिनों के आने का इंतजार करें। निश्चित ही भगवान भास्कर की कृपा से सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वरदान मिलेगा।

(महिलाए नाक की टिप से मांग भरकर बाटी खुशियाँ )
छठ की पूजा में महिलाएं नाक की टिप से लेकर बालों में बीच मांग निकालकर पूरा सिंदूर भरकर सिर में लगाती है। नारंगी रंग के सिंदूर को इस तरह लगाने को लेकर मान्यता है कि सिंदूर ऐसा लगा होना चाहिए कि सबको दिखे। सिंदूर को नाक से लेकर सिर पर लंबी लाइन बनाकर लगाने से पति की उम्र लंबी होती है। वहीं नारंगी रंग का सिंदूर भगवान सूर्य की लालिमा का प्रतीक मानते हैं जो हमेशा चमकता है पति की लंबी आयु और तरक्की की कामना के लिए नाक से लेकर मांग में लंबा सिंदूर भरती है।

(आयोजन को सफल बनाने में इनका रहा सहयोग)
प्रति वर्ष की भाति इस वर्ष भी इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष रवि पासवान,सचिव केशव झा,सोम पांण्डेय,मनोज पाल,तरुण अचारी ,गणेश दास,सुनील पांण्डेय पार्षद पुष्पेंद्र साहु ,सूरज मरकाम,अरविंद ओझा,द्रोड सोनकलिहारी, दिनेश कौशिक,हेमंत पाठक,संजय यादव,पप्पू निर्मलकर सहित आयोजन समिति व नगरवासियों सहित सिरगिट्टी पुलिस का भरपूर सहयोग रहा। आयोजन के संयोजक नवीन सिंह व डॉ. राजकुमार खेत्रपाल रहें।


