-827 मनोकामाना ज्योति से जगमगा उठा मंदिर।
– 125 वर्षो से विराजमान है माता त्रिपुर सुंदरी।

बिलासपुर – {कन्हैया कौशिक}
– बिलासपुर रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूरी पर सिरगिट्टी न्यू लोको कॉलोनी के अंतिम छोर पर माँ त्रिपुर सुन्दरी मरीमाई मन्दिर प्राचीन काल से विराजमान है मंदिर के पीछे फदहाखार जंगल तथा मंदिर के सामने तालाब मंदिर की भव्यता पर चार चांद लगा रही है। तालाब के दूसरे छोर पर भैरवनाथ विराजमान है मंदिर के प्राचीनकालीन होने के कारण यह धार्मिक आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। सन 1901 में निर्मित इस मंदिर मे वर्ष भर भक्तो का ताता लगा रहता है विशेष कर चैत्र नवरात्रि एवं शारदिय नवरात्रि में हजारों की संख्या में श्रद्धांलू माता के दर्शन को पहुंच रहे है अब इस मंदिर को सिद्धपीठ त्रिपुर सुंदरी मरी माई के रूप से लोग जांनने लगे है जहां प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष चैत्र नवरात्र में लोगों का आस्था स्वरूप 827 मनोकामना ज्योत प्रज्वलित की गई है। इस नौ दिवसीय नवरात्र में माता का प्रतिदिन अलग-अलग श्रृंगार के साथ ही नवचंडी पाठ भी किया जाएगा जिसकी शुरुवात नवरात्रि के पहले दिन मंगलवार को घट स्थापना व मनोकामना ज्योत प्रज्वलित के साथ ही हो चुकी है जहां महाअष्टमी में 108 कन्याओं को भोजन व पूजन किया जाएगा प्रतिदिन प्रातः कालीन वह शाम की आरती में क्षेत्र के श्रद्धालु गोते लगा रहे हैं वही श्रद्धांलुओं को कोई समस्या न हो इस व्यवस्था मे त्रिपुर सुंदरी मरी माई मंदिर ट्रस्ट जुटे हुए है ।

(दिन दुःखिया की हर दिन होती है सेवा)
त्रिपुर सुंदरी मरी माई मंदिर मे जिस प्रकार श्रद्धांलु माता के दर्शन करने पहुंचते है उसी प्रकार यहा प्रतिदिन माता के आशीर्वाद से दिन दुःखियाओ की परेशानी का निराकरण माता के आशीर्वाद से किया जाता है। इस सेवा को देने पुजारी बाबा सहित सहयोगी व ट्रस्ट सदस्य हर दिन जुटे होते है मान्यता है की सच्ची आस्था लेकर जो भी मंदिर मे शिष झुकाता है माता उसकी सभी विघ्न क्लेश हर लेती है।

(धरती के अंदर शिला के रूप मे प्रकट हुई थी माँ)
सन 1901 में निर्मित मंदिर में स्थापित मूर्ति धरती के अंदर से शीला के रूप में प्रकट हुई थी माँ त्रिपुर सुन्दरी ने सेवा निर्वित कर्मचारी स्व.सदानंद आचारी को स्वपन में आकर अपनी उपस्थिति की प्रमाण दी आचारी ने माँ की भव्यता से अभिभूत होकर,आज्ञा स्वरूप एक कल्पित प्रतिमूर्ति को भव्यत्म रूपाकार देकर माँ की मंदिर की स्थापना की माँ के मंदिर के पीछे एक पलाश के वृक्ष जहाँ नाग देवता वर्षो के विराजमान है पुजारी की माने तो वही माँ की सम्पूर्ण रक्षा करता है साधक एवं भक्तगण मंगलवार और शुक्रवार को वृक्ष के निचे दूध रखते है।

