कन्हैया कौशिक-{बिलासपुर}

-केंद्रों में धान के रखरखाव का दावा जमीनी हक़्क़ीक़त कुछ और।
-बिन मौषम बारिश से किसानो की चिंता बढ़ी ।
– सिलपहरी धान मंडी में प्रति बोरे एक से दो किलो अतरिक्त तौला जा रहा है धान।
बिलासपुर सिरगिट्टी – धान मंडी में किसानों की हजारों क्विटंल धान की फसल पहुंच चुकी है मगर फसल को संभालने के लिए सम्बन्धित व्यवस्थापक के पास कोई उचित प्रबंध नहीं है जो है ओ प्रयाप्त नही है वही मंडी प्रांगण में छावनी नही होने के चलते अचानक आई बारिश में अनाज खुले आसमान के नीचे पड़ी हुई है दो घंटे की झड़ी से बोरे में भरे धान का ऊपरी हिस्सा भींग चुका है। सिरगिट्टी समीपस्थ ग्राम हरदी कला टोना व सिलपहरी स्थित सेवा सहकारी समिति मर्यादित धान मंडी केंद्र में आस पास किसानों के धान की खरीदी की जा रही है जिसमे हरदी में लगभग 6 हजार क्विंटल व सिलपहरी में 5 हजार क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है। जिसमे से हरदी स्थित मंडी से अभी तक धान का उठाव नहीं हुआ है जबकी सिलपहरी में धान उठाव हो रहा है इन मंडीयो में छावनी की कोई व्यवस्था नही है जिसके चलते किसानो के धान खुले आसमान के नीचे रखा गया है हालाकी तालपोरिंग से धान की छल्लियों ढका गया है परन्तु ओ भी आधी अधूरी जितना धान मंडियो में है उतने के लिए ढकने की व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते मंगलवार की दोपहर हुई बारिश के चलते इस केंद्र में रखे 20 से 25 प्रतिशत धान भीग गए है अब धान के खराब होने का खतरा बना हुआ है अचानक हुई बारिश की वजह से भीगा हुआ धान अब अंकुरित हो सकता है। प्रशासन ने धान खरीदी करने से पहले जिले सहित क्षेत्र के सभी केंद्रों में धान को सुरक्षित रखने का दावा किया था लेकिन बेमौसम बारिश ने प्रशासन के इस दावे की पोल खोल कर दी है केंद्रों में तिरपाल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की वजह से धान खुले आसमान के नीचे भीग रहे है।

(सिलपहरी मंडी में खुले थे बोरियो के मुँह हर कट्टे में एक से दो किलो धान अतरिक्त) सिलपहरी स्थित धान मंडी में आधे से ज्यादा धान बिना ढ़के हुए रखा गया था इसके साथ ही यहा किसानों से लिए धान तौल के बाद मुँह को बांधा नहीं गया था जिसके चलते उसमे बारिश का पानी रम गया है। इसके साथ ही जब नवभारत की टीम यहा पहुंची तो हर कट्टे में एक से दो किलो धान अतरिक्त की तौल की जा रही थी जबकी तौल में बरदाने के जगह एक अतरिक्त बारदाना रखा गया था। जिससे साफ है की यहा हर बोरी में किसानो की खून पसीने की कमाई का कुछ हिस्सा मंडी समिति के खाते में जा रहा है जो कही न कही जांच का विषय है।

(कई किसानों के खेतो में पड़े है कट कर धान बारिश से भींग गए )
विकास खण्ड बिल्हा के अधिकांश किसान अभी अपने खेतो के तरफ रुख मोड़े है जिनके द्वारा धान की कटाई करने के बाद धान खेत में ही रखा हुआ है बिना बादल बारिश से यह धान भी भींग चुका है। इसके साथ ही कई खेतो में झड़ी व हवा के चलते धान की बाली गीली होकर वजन के कारण जमीन पर झुक गया है किसके कारण किसानो की चिंता बढ़ गई है अब जमीन में सोए हुए धान की कटाई करने में इन्हे काफी समस्या का सामना करना पड़ेगा।
(तिरपाल व रखरखाव के लिए लाखों आबंटन बावजूद बदहाल )
उक्त मंडी सहित जिले के सभी मंडियो में बारिश से धानो को बचाने प्रयाप्त मात्रा में तिरपाल की व्यवस्था करने सहित उचित रखरखाव हेतु लाखो रुपये की स्वीकृति की जाती है बावजूद इन सभी केंद्रों में अव्यवस्था नजर आता है जो समझ से परे है ।


