बिलासपुर / मस्तूरी की सड़कों पर गूंजती गोलियों ने सिर्फ एक वारदात नहीं, बल्कि उस सड़े हुए सिस्टम को उजागर कर दिया है,जहां राजनीतिक संरक्षण, खनिज , मवेशी,नशे के सामग्री की तस्करी और ठेकेदारों की माफिया लॉबी एक-दूसरे की ढाल बने बैठे हैं। सात गिरफ्तारियां हो चुकीं, 20 से ज़्यादा लोगों से पूछताछ पूरी हो चुकी, लेकिन “किंगपिन कौन है? -यह सवाल अब भी हवा में तैर रहा है।
(थाना से महज 200 मीटर दूर फिर भी गोलियों की बरसात पुलिस पर बड़ा सवाल)
शहर में हर गली पर गश्त का दावा करने वाली पुलिस, मस्तूरी में तब सोई मिली जब अपराधी खुलेआम फायरिंग कर रहे थे।
सिर्फ 200 मीटर दूर थाना, पर ना रोक, ना टोक, ना जवाबी कार्रवाई! यह चुप्पी सिर्फ लापरवाही नहीं – यह सिस्टम की साज़िशन खामोशी है
(20 पूछताछ, 7 गिरफ्तार ‘ पर असली चेहरा अब भी गायब)
एसीसीयू की टीम अब तक 20 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। एडिशनल एसपी अर्चना झा के मुताबिक कई बड़े नाम सामने हैं।लेकिन सवाल वही – क्या ये नाम वाकई सामने आएंगे, या फिर किंगपिन किसी सियासी गलियारे में सुरक्षित बैठा है?
(सिरगिट्टी से मिले हथियार)
मस्तूरी की फायरिंग में इस्तेमाल हथियारों के तार अब सिरगिट्टी और मध्यप्रदेश तक पहुंच गए हैं। छत पर मिला .22 बोर का पिस्टल, 12 राउंड की मैगज़ीन। इसमें भी सवाल लाजमी आखिर किसके इसारे पर हुई ए घिनौना करतूर समाज को कलंकित करने के पीछे आखिर किसका चेहरा हैं।इससे पहले भी सिरगिट्टी क्षेत्र के कुछ लोग हथियार के साथ न सिर्फ पकड़े गए थे बल्कि एक मामले में सलाखों के पीछे थे। परन्तु हथियार आया कहा से अब तक गुमनाम हैं।
(बिलासपुर में इतने घातक हथियार आखिर आ कहां से रहे हैं)
खनिज माफिया, मवेशी तस्कर, ठेकेदार – सबका ‘कॉमन लिंक’ कौन?
हर बड़े क्राइम की जड़ में एक ही फॉर्मूला – “पैसा, राजनीति और पुलिस की चुप्पी।”
खनिज माफिया बेलगाम हैं, मवेशी तस्कर पुलिस के नाक के नीचे कारोबार चला रहे हैं, और ठेकेदारी माफिया इलाके में दहशत बन चुके हैं।
(पुलिस जानती है, पर कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर पर – क्यों?)
कानून की किताब में सवाल… जवाब सिर्फ फाइलों में!
आखिर पुलिस को बड़े अपराधियों की लोकेशन क्यों नहीं मिलती?
क्या मवेशी व शराब तस्कर पुलिस की “पकड़ से बाहर” हैं या “पहुंच के भीतर”?
200 मीटर दूर थाना – फिर भी गोलियों की बारिश कैसे हुई?
फायरिंग के पीछे कौन सा ‘नेटवर्क’ काम कर रहा है?
क्या स्थानीय राजनीति ने अपराधियों को सुरक्षा कवच दे रखा है?
“सिस्टम साइलेंट मोड में है” – ग्राउंड पर गुस्सा, जनता में डर
मस्तूरी और आसपास के इलाकों में अब दहशत का माहौल है।
लोग कह रहे हैं – “यह अब अपराध नहीं, खुला आतंक है।
शहर के हर कोने में अब चर्चा सिर्फ एक – “कौन है वह शख्स, जिसके इशारे पर गोलियां चलीं?”
पुलिस की ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस’ बनाम जनता की ‘प्रेसर कॉन्फ्रेंस’
एक ओर पुलिस कल खुलासे की तैयारी में है, दूसरी ओर पीड़ित पक्ष और आम लोग लगातार सवाल पूछ रहे हैं।
एक पिस्टल से सात गोली? दो कट्टों से इतना बारूद? पुलिस की थ्योरी और जमीन की सच्चाई में फर्क साफ़ दिखता है।
“मस्तूरी गोलीकांड” सिर्फ एक वारदात नहीं, बिलासपुर की चेतावनी है!
अगर अब भी पुलिस और प्रशासन ने सबक नहीं लिया,तो आने वाले दिनों में बिलासपुर छत्तीसगढ़ का नया “क्राइम हब” बन सकता है। क्योंकि गोलियों की गूंज सिर्फ मस्तूरी में नहीं, अब पूरे सिस्टम में सुनाई दे रही है।

