– युवक गंभीर हालात मे लड़ रहा जिंदगी से जंग।
– संबंधित बोले जैमर लगा चढ़जाओ फिर कैसे दौड़ गई करंट।

बिलासपुर – बीते शनिवार को बिलासपुर रेलवे के कोचिंग डिपो मे हाईटेंशन तार की चपेट मे आने से एक ठेका कर्मी बुरी तरह झूलस गया था। जिसका उपचार अपोलो मे चल रहा है डाक्टरो के अनुसार इस दुर्घटना मे युवक का शरीर 80 प्रतिशत तक झूलस चुका है और उसकी स्थिति पहले से भी नाजुक बनी हुई है। घटना के बाद परिजनों ने इस मामले की रिपोर्ट सिरगिट्टी थाने मे दर्ज करवाया है सिरगिट्टी पुलिस इस मामले मे 125 बी के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जांच मे जुट गई है। गौरतलब हो की शनिवार को रेलवे डिपो मे काम कर रहें मूलमुला निवासी प्रताप बर्मन पिता रामसिंह बर्मन उम्र 27 वर्ष को कार्य के दौरान रेलवे की हाई टेंशन लाईन की चपेट में आने से गंभीर रूप से झूलस गए है। इस मामले मे थाना सिरगिट्टी मे रिपोर्ट दर्ज कराई गई है बताया गया है की उक्त कार्य के दौरान हर दिन की तरह चरण दास व प्रताप दोनों काम कर रहें थे। उसी दौरान बारिश हुआ जिसके बाद दोनों नीचे उतरे परन्तु जल्दी काम करवाने के लिए रेलवे डिपो इंचार्ज एस आर मीना के द्वारा बिना जैमर बंद करवाए व उसकी सुचना दिए प्रताप को बोगी के ऊपर चढ़ा दिए । जैसे ही युवक ऊपर चढ़ा बोगी के ऊपर गुजरी 25 हजार हाई टेंशन लाईन की चपेट मे आ गया जिससे ओ पुरी तरह झूलस गया सिरगिट्टी पुलिस मामले की जांच मे जुट गई है।

(घटना मे गंभीर युवक प्रताप)
(घटना के बाद मची खलबली छुट्टी के दिन मीटिंग)
जानकारी के मुताबिक इस दुर्घटना के बाद रेलवे मे खलबली मच गईं है यहां रविवार को रेलवे के अधिकारी व संबंधित ठेकेदार सहित रेलवे यूनियन की एक मीटिंग बुलाई गई यहां रेलवे के अधिकारी अपना पल्ला झाड़ने मे लगे हुए है। यहां संबंधितो द्वारा इस मामले मे रेलवे का नाम न आए इस लिए यहां कार्य कर रहें ठेका कर्मियों को धमकाया जा रहा है। उसे कार्य के दौरान होने वाली छति का स्वयं जिम्मेदार होने व बनाए गए लेटर पर हस्ताक्षर करने के शर्त पर काम मे रखने का दबाव बनाया जा रहा है इस बात पर मीटिंग के दौरान यहां कर्मियों व अधिकारियो के बीच बहस भी हुआ।
(दुर्घटना के बाद रेलवे की कई खामिया सामने आई है) सूत्रों की माने तो इस डिपो मे सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए जाते न ही कर्मियों को हैंड ग्लब्स और नीचे सफाई सहित ऊचाई मे काम करने वाले कर्मियों को हेलमेट दिया गया है यहां तक यहां किसी भी प्रकार से घायल कर्मियों के प्रारम्भिक उपचार हेतु दवा उपलब्ध है। यहां पहले भी इस तरह के कई हादसे हो चुकी है जिसमे से अधिकांश मामले रेलवे ठेकेदार व पीड़ित के बीच आपसी समझौते मे सिमट कर रहा जाता है।
(एंबुलेंस तक नहीं माल वाहक मे घायल को पहुंचाया अस्पताल) उक्त घटना के दौरान पहले करंट लगने पर युवक बोगी के ऊपर अचेत होकर पड़ा रहा लगभग 15 मिनट बाद युवक अपने पैरो मे फिर से खडे हुआ जों दोबारा 25 हजार हाईटेंशन करंट की चपेट मे आ गया। जानकारों के मुताबिक इस 15 मिनट के दौरान लाईन बंद करने कर्मी कहते रहें परन्तु न लाईन बंद की गई न ही उसे उतारने पहल किया गया। उसे उपचार के लिए एम्बुलेंस तक नसीब नहीं हुआ उसे गंभीर स्थिति मे साथी माल वाहक से अस्पताल मे भर्ती करवाए।
(कर्मियों को सचेत करने वाला हुटर व माइक भी था बंद) उक्त डिपो मे किसी ट्रेक पर गाड़ी लगने वाली है कार्य के बाद कौनसी गाडी निकलने वाली है। कौनसे ट्रेक की जैमर करंट बंद करने वाली यंत्र बंद है कौनसा चालू है कर्मियों को इसकी जानकारी देने के लिए डिपो के स्टोर रूम पर लगे माईक व हुटर से सचेत किया जाता था परन्तु कुछ दिनों से ओ भी बंद था। कर्मीयों को कितने समय मे काम खत्म करना है संबंधितो के द्वारा मौखिक तौर से बताया जा रहा था। परन्तु जिस समय यहां दुर्घटना घटा उसके महज कुछ ही घंटे बाद डिपो मे हुटर भी शुरू हो गया और माईक से जानकारी भीदेना शुरू हो
गया।

