-हावड़ा नागपुर एंड साईड पर हुआ हादसा, युवक की हालात नाजुक।
– रेलवे ठेकेदार की लापरवाही हाइटेंशन तार की चपेट में आया युवक।
– बिलासपुर रेलवे कोचिंग सेंटर में गंभीर हादसा,ठेका कर्मी बुरी तरह झुलसा।
(बोगी के ऊपर तड़पता रहा युवक-फोटो)
बिलासपुर – बिलासपुर रेलवे के कोचिंग डिपो मे काम करते वक़्त एक ठेका कर्मी हाईटेंशन तार की चपेट मे आकर बुरी तरह झूलस गया। जिसे उपचार के लिए अपोलो मे भर्ती किया गया है जहाँ उसकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है।

यह हादसा उस वक़्त घटा जब हावड़ा नागपुर इंड लाइन पर कुछ वैगन प्लेसमेंट किया गया था जिसमे सफाई का काम चल रहा था। उस बैगन मे मुलमूला निवासी प्रताप बर्मन भी काम कर रहा था उस वक्त बोगी सफाई के साथ ही संबंधित ठेकेदार के द्वारा प्रताप को बोगी के ऊपर चढ़कर लिकेज चैक करने बोला जैसे ही उसने सफाई शुरू की, ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन तार से जोरदार करंट दौड़ा और प्रताप उसकी चपेट में आ गया।

चश्मदीद कर्मचारियों के मुताबिक प्रताप को लगातार दो बार करंट लगा जिसके बाद जोरदार धमाका हुआ और वह बुरी तरह झुलस गया। कुछ देर तक कोच के ऊपर ही तड़पता रहा और फिर नीचे आ गिरा जहां उसके सिर नाक और मुंह पर भी गंभीर चोटें आईं। हादसे के तुरंत बाद अन्य कर्मचारियों ने उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

इस हादसे ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यस्थल पर सावधानी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं हादसा न केवल सुरक्षा इंतज़ाम की पोल खोलता है बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे ठेकेदार और रेलवे प्रशासन लापरवाही की आड़ में गरीब मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
(लापरवाही- जिस लाईन मे आना था वन्दे भारत उसमे की गई बोगी प्लेसमेंट)
जानकारी के अनुसार जिस हावड़ा – नागपुर एंड रैक पर प्रताप सफाई कर रहा था उसी पर वंदे भारत ट्रेन के आने की तैयारी चल रही थी। इसलिए हाईटेंशन सप्लाई बंद नहीं की गई दुसरी तरफ इसी रैक के आगे कुछ बोगिया प्लेसमेंट कर दी गई जिसमे ठेकेदार द्वारा कार्य करवाया जा रहा था।उस बोगी के ऊपर गुजरे हाई टेंशन लाईन चालू था यह जानकारी प्रताप तक पहुंचाना तो दूर किसी ने सुरक्षा उपाय तक नहीं किए नतीजा यह हुआ कि वह करंट की चपेट में आ गया।
(गंभीर हालत मे उपचार के भटकता रहा )
गंभीर हालत में प्रताप को साथी कर्मचारियों और रेलवे अफसरों ने पहले रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन यहां भी हकीकत सामने आ गई अस्पताल में गंभीर झुलसे मरीज के इलाज के लिए न तो उपकरण थे और न ही पर्याप्त साधन। मजबूरी में प्रताप को सिम्स अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन वहां भी बर्न वार्ड में इलाज की स्थिति दयनीय रही अंततः अफसरों ने आनन-फानन में प्रताप को अपोलो अस्पताल शिफ्ट किया फिलहाल वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।
(आखिर किसकी लापरवाही का दंश झेलने मजबूर है कर्मी)
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर उस वक्त करंट सप्लाई बंद कर दी जाती तो हादसा टल सकता था। लेकिन ठेकेदार और अफसरों की लापरवाही ने एक मजदूर की जिंदगी को मौत के मुहाने पर ला खड़ा कर दिया। इस हादसे ने साफ कर दिया कि कोचिंग डिपो में काम करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा इंतज़ाम से वंचित रखा जाता है। ठेकेदार रायपुर से क्लीनिंग का ठेका लेकर मजदूरों से सिर्फ तीन-तीन महीने का कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाता है और उन्हें बिना हेलमेट,बिना सेफ्टी बेल्ट और बिना इंसुलेटेड औजार के ही ऊंचाई पर काम करने भेज देता है।

